बनी अधरों की है मुस्कान देखो फिर से इक बेटी!
बनी हम सबका है अभिमान देखो फिर से इक बेटी!
इन्हें बोझा समझकर मारने वालों जरा देखो,
तिरंगे का बनी है शान देखो फिर से इक बेटी!!
शनिवार, 24 नवंबर 2018
तिरंगे का बनी है शान(मैरीकॉम)
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018
मुल्क को मीत लिखता हूँ,,,,
नही सजनी व साजन के,कभी मैं गीत लिखता हूँ !
नही लैला व मजनू की,कभी मैं प्रीत लिखता हूँ !
वतन ही आन है मेरी,वतन ही जान है मेरा ,
सदा मैं मुल्क को अपने,हृदय का मीत लिखता हूँ!!
बुधवार, 10 अक्टूबर 2018
न बहकूँ धर्मपथ से भी,,,,
मिटा दुःख के अंधेरों को,तू सुख जीवन में भर
दे माँ !
है संकट जो भी जीवन में,उसे तू दूर कर
दे माँ !
शिखर पर जब कभी पहुँचूँ,तनिक न दर्प
छू पाए,
न बहकूँ धर्म पथ से भी,मुझे तू ऐसा वर
दे माँ !!
-----------
-सुनिल शर्मा"नील"
CR
न काँपें हाथ सच लिखने से
मिटा दुःख के अंधेरों को,तू सुख जीवन में भर दे माँ !
है संकट जो भी जीवन में,उसे तू दूर कर दे माँ !
शिखर पर जब कभी पहुँचूँ,तनिक न दर्प छू पाए,
न काँपे हाथ सच लिखने से,तू मुझको ऐसा वर दे माँ !!
मंगलवार, 25 सितंबर 2018
बिक नही सकते
जो है नही वैसा कभी दिख नही सकते !
लोभ के वशीभूत होकर बिक नही सकते !
लाख आए मुसीबतें सत्य के पथ में किंतु,
कविता चरनचुम्बन की लिख नही सकते!!
गुरुवार, 13 सितंबर 2018
मंगलवार, 4 सितंबर 2018
तीजा पर कविता
पति के कारण निर्जला रहती माताएं आज!
करती "शिवगौरा"पूजन करके श्रृंगारिक साज!
नही मांगती खुद खातिर मांगती केवल इतना ही,
सदा सजे मेरी मांग पर प्रभु मेरे सुहाग का ताज!!
शनिवार, 25 अगस्त 2018
वही बहना दुआओं में,,,,,
हरेक धड़कन में वो मुझको सदा ही याद करती है
मेरे खुशियों की खातिर,ईश से फरियाद करती है !
सताकर खूब बचपन में,रुलाया था जिसे मैंने
वही बहना दुआओं से,मुझे आबाद करती है!!
अटल जी पर कविता
राजनीति का अर्थ विश्व को समझाकर तुम चले गए
क्या होता है जीवन जीना सिखलाकर तुम चले गए!
अहम नही था किंचित तुममें नही किसी से जलते थे
हो परिस्थितियाँ जैसी भी तुम सत्यमार्ग
पर चलते थे
पक्ष और विपक्ष को तुमने एकसमान सम्मान दिया
सदा सियासत में होंठों को प्रेम का तुमने गान दिया
राजनीति के मिथकों को सारे
झूठलाकर चले गए !
जैसे अंदर से थे तुम बाहर से भी वैसा ही दिखते थे
बड़े धुरंधर कवि अटल थे काल कपाल पे लिखते थे
जब भाषण देते थे तुम तो मंत्रमुग्ध सब सुनते थे
कविताओं में सबल राष्ट्र के सपनों को तुम बुनते थे
विश्वपटल पर हिंदी को पहचान दिलाकर चले गए !
सुदूर ग्राम्य को सड़कों द्वारा शहरों से तुमने
जोड़ा था
नापाकी जब हाथ उठे करगिल मे उनको
तोड़ा था
स्वर्णिम चतुर्भुज का जाल तुम्ही ने भारत में था फैलाया
पश्चिम के रोक पर भी दम पोखरण में था दिखलाया
भारत को परमाणुशक्ति देश बनाकर चले गए !
सदियों में कोई तुमसा विरला ही पैदा
होता है
जो कृतित्व से अपने भाईचारा को
बोंता है
जो स्वदेश की खातिर अपना जीवन
अर्पित करता है
भारत माँ के चरणों में सर्वस्व समर्पित करता है
राष्ट्रवाद है सबसे बढ़कर यह बतलाकर
चले गए!
राजनीति का अर्थ विश्व को समझाकर,,,
राजनीति का अर्थ विश्व को समझाकर तुम चले गए
क्या होता है जीवन जीना सिखलाकर तुम चले गए!
अहम नही था किंचित तुममें नही किसी से जलते थे
हो परिस्थितियाँ जैसी भी तुम सत्यमार्ग पर चलते थे
पक्ष और विपक्ष को तुमने एकसमान सम्मान दिया
सदा सियासत में होंठों को प्रेम का तुमने गान दिया
राजनीति के मिथकों को सारे झूठलाकर चले गए !(1)
जैसे अंदर से थे तुम बाहर से भी वैसे दिखते थे
बड़े धुरंधर कवि अटल थे काल कपाल पे लिखते थे
जब भाषण देते थे तुम तो मंत्रमुग्ध सब सुनते थे
कविताओं में सबल राष्ट्र के सपनों को तुम बुनते थे
हिन्दी को उसका खोया सम्मान दिलाकर चले गए !(2)
गांव है भारत की आत्मा उनको सड़कों से जोड़ा था
पाकिस्तानी हाथों को करगिल मे मोड़कर तोड़ा था
स्वर्णिम चतुर्भुज का जाल तुम्ही ने भारत में था फैलाया
पश्चिम के रोक पर भी दम पोखरण में था दिखलाया
भारत को परमाणुशक्ति देश बनाकर चले गए !(3)
सदियों में कोई तुमसा विरला ही पैदा होता है
जो कृतित्व से अपने भाईचारा को बोंता है
जो स्वदेश की खातिर अपना जीवन अर्पित करता है
भारत माँ के चरणों में सर्वस्व समर्पित करता है
राष्ट्रवाद का मंत्र सभी को तुम बतलाकर चले गए!(4)
जो जीते जी हृदयों में देवों सा पूजे जाते
है
जिसके जाने से कोटिशः आंखें नम हो
जाते है
सबसे पहले देशधर्म है देश को तुमने गान
दिया
राष्ट्रवाद का नारा सबको बतलाकर तुम
चले गए!(अतिरिक्त)
शुक्रवार, 24 अगस्त 2018
राजनीति का अर्थ विश्व को समझाकर तुम चले गए,,,
राजनीति का अर्थ विश्व को समझाकर तुम चले गए
क्या होता है जीवन जीना सिखलाकर तुम चले गए!
अहम नही था किंचित तुममें नही किसी से जलते थे
परिस्थितियाँ जैसी भी हो तुम सत्य मार्ग पर चलते थे
पक्ष और विपक्ष को तुमने एकसमान सम्मान दिया
सबसे पहले देश हमारा जग को तुमने ज्ञान दिया
राष्ट्रवाद का नारा सबको बतलाकर तुम चले गए!
अंदर और बाहर दोनो से एकसमान तुम दिखते थे
बड़े धुरंधर कवि अटल थे काल कपाल पे लिखते थे
जब भाषण देते थे तुम तो मंत्रमुग्ध सब सुनते थे
नित भारत को सबल बनाने के ही सपने बुनते थे
भारत को परमाणु बम की ताकत बनवाकर चले गए !
गांव है भारत की आत्मा उनको सड़कों से जोड़ा था
पाकिस्तानी हाथों को करगिल मे मोडकर तोड़ा था
स्वर्णिम चतुर्भुज का जाल तुम्ही ने भारत में था फैलाया
पश्चिम के रोकने पर भी पोखरण मे दम दिखलाया
बस में पाक जाकर कूटनीति के ककहरे दिखाकर चले गए !
-सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
सोमवार, 20 अगस्त 2018
एक पुराना मुक्तक
दुनिया बनइया तोर खेल निराला हे
दिखथे सिधवा तेने गड़बड़झाला हे
अब कहा होवत हे मान बने मनखे के
इहा भल करइया हर हाथ म छाला हे|
सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया......
21/8/2015
रविवार, 19 अगस्त 2018
अटल बिहारी अमर रहे,,,
राजनीति के कीचड़ में तुम बनकरके एक कमल रहे !
अमेरिकी प्रतिबंधों के आगे भी बिल्कुल अटल रहे !
जाते वक्त भी देश को तुमने एकसूत्र में बांध दिया,
मौत भी रोते-रोते कह गई अटल बिहारी अमर रहें !!
गुरुवार, 16 अगस्त 2018
सदा रहे ब्रम्हचारी थे
संस्कारों की प्रतिमूर्ति थे जो,भारतमाता के पुजारी थे !
देश ही जिनका परिवार था,जो सदा रहे ब्रम्हचारी थे !
देकर चकमा अमेरिका को,जिसने भारत को ताकत दी,
ऐसे निर्भीक,जन-जन के प्रिय प्यारे अटल बिहारी थे !!
चिरनिद्रा में
टूटके एक दैदीप्यमान तारा आसमान
में कहीं खो गया
प्रेरणा ने जिसकी मुझे कवि बनाया
आज चिरनिद्रा में सो गया!
शनिवार, 11 अगस्त 2018
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है,,,,
जिंदगी में कभी पाना तो कभी खोना है
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है !
चार दिन मिले है डर-डरकर क्यों जीना
जो लिखा है आखिर में एकदिन होना है !
क्या विश्राम करना जिंदगी के सफर में
जब मंजिल पर पहुँचकर जीभर सोना है !
खाली हाथ आए और खाली हाथ जाना है
द्वेष,निंदा,बुराई,बेवजह क्योंकर ढोना है!
मनुष्य होकर मनुष्य से आखिर कैसी दूरी
इंसानियत पर हैवानियत का कैसा टोना है!
अविश्वास,धोखा,बेईमानी,में आकंठ डूबा
नही अब दिलों में मुहब्बत का कोई कोना है !
जो जैसा बाँटता है वही तो पाता है"नील"
संस्कारों के पौधें यही सोंचकर बोना है!
-सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
7828927284
बुधवार, 8 अगस्त 2018
कोस रहा है किस्मत को,,,
कर्म किया करता है कोई,कोस रहा है किस्मत को !
बाँट नफरतें कोई जग में,माँग रहा है उल्फत को !
नादाँ है जो बोंकर काँटे,इच्छा करतें फूलों की,
आँसू देकर जग को कोई,सोंच रहा है जन्नत को !!
✍🏻*सुनिल शर्मा"नील"*✍🏻
नही मिलेगा राष्ट्र दूसरा,,
एक दूजे का दर्द बाँटकर लोग जहाँ पर सहते हैं!
चोट लगे जहाँ जुम्मन को अलगू के आँसू बहते हैं!
नहीं मिलेगा राष्ट्र दूसरा ढूँढलों तुमको भारत सा,
हिन्दू-मुस्लिम,सिक्ख-ईसाई,मिलजुलकर जहाँ रहते हैं।।
--सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
(छत्तीसगढ़)
मंगलवार, 7 अगस्त 2018
राष्ट्रीय एकता का मुक्तक
एक दूजे का दर्द बाँटकर लोग जहाँ पर सहतें है!
चोंट लगे जहाँ अनवर को तो राम के आँसू बहतें है !
नही मिलेगा राष्ट्र ढूँढ लो दुनिया में तुमको भारत-सा ,
हिन्दू-मुस्लिम,सिक्ख-ईसाई,मिलजुलकर जहाँ रहतें हैं !!
नही मिलेगा राष्ट्र ढूंढ लो,,,
एक दूजे का दर्द बाँटकर जहाँ पे सारे
सहतें है!
दर्द मिले जहाँ अनवर को तो राम के आँसू
बहतें है !
नही मिलेगा राष्ट्र ढूँढलो तुमको भारत-भूमि
सा ,
हिन्दू-मुस्लिम,सिक्ख-ईसाई,मिलजुलकर
जहाँ रहतें हैं !!
रविवार, 5 अगस्त 2018
है रिश्ता खून से बढ़कर,,,
मेरी खुशियों से जिस व्यक्ति का,इक मजबूत नाता है !
जो नयनों में मेरे अश्रु को,किंचित भी न भाता है !
है रिश्ता खून से बढ़कर कहीं ,उससे मेरा यारों ,
ये रिश्ता दिल का है जो"मित्रता",जग में कहाता है !!
-सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
7828927284
शनिवार, 4 अगस्त 2018
रोहिंग्या पर बोलने वालों,,,,
हम निर्वासित अपने घर से,गैर शान से रहतें है !
अत्याचार की स्मृतियों से,ये आँसू हरदम बहतें है !
रोहिंग्या पर बोलने वालों,याद है हम या भूल गए ,
हम कश्मीर के मूल निवासी,पंडित हमको कहते है !!
-सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
7828927284
हम कश्मीर के मूल निवासी,,,
हम निर्वासित अपने घर से,गैर मजें से रहतें है !
दारुण दुःख की स्मृतियों से अक्सर ये आँसू बहतें है !
रोहिंग्या के पैरोकारों,याद है हम या भूल गए,
मूल निवासी हम कश्मीर के,पंडित हमको कहतें है !!
-सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
7828927284
वोंट के लिए,,,,
घुसपैठियों को मिलती यहाँ पुचकार है !
कश्मीरी पंडितों को मिलता दुत्कार है !
वोंट के लिए देश जलाने वाले नेताओं,
तुम्हारी गंदी सियासत से देश शर्मसार है!!
बुधवार, 1 अगस्त 2018
वोंट के लिए,,,,
घुसपैठियों को मिलती यहाँ पुचकार है !
कश्मीरी पंडितों को मिलता दुत्कार है !
वोंट के लिए देश जलाने वाले नेताओं,
तुम्हारी गंदी सियासत से देश शर्मसार है!!
मंगलवार, 31 जुलाई 2018
जहाँ मजहब नही पहचान हो,,,
मिटाकर भेद आपस की,दिलों से दिल मिलेंगे जब !
गगन-धरती मिलेंगे फिर,कमलदल उर खिलेंगे तब !
जहाँ मजहब नही पहचान हो सबकी तिरंगे से ,
बनाएँगे नया भारत,जहाँ मिलकर रहेंगे सब !!
मापनी : 1222 1222 1222 1222
-सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया
सोमवार, 30 जुलाई 2018
कुछ उनकी सुनो,,
कुछ उनकी सुनो,कुछ अपनी सुनाते
चलो !
मोहब्बत के मरहम से,हर घाव मिटाते
चलो !
जिंदगी नही चलती,हर बात दिल मे
लेने से,
कुछ बातें वह भूले,कुछ तुम भी भूलाते
चलो !!
शुक्रवार, 27 जुलाई 2018
कोहिनूर बनाया गुरु ने,,,
कोहिनूर बनाया गुरु ने,,,,
************************
जीवनपथ पर मुझे चलना सिखाया गुरु ने
जब भी भटका सदमार्ग दिखाया गुरु ने !
क्या हूँ और क्यों हूँ ज्ञात नही था मुझे
मेरे अस्तित्व का उद्देश्य बताया गुरु ने !
मैं तो कोयला था,कोई कीमत न थी मेरी
मुझे तराशकर कोहिनूर बनाया गुरु ने !
जब-जब उखड़ते थे संकटों में पग मेरे
तूफां से लड़ने का पाठ पढ़ाया गुरु ने !
सादा जीवन,सादा आहार,उच्च विचार
सादगी का हरदम मंत्र सुझाया गुरु ने !
कुछ ने अपशब्द कहे कुछ ने भूलाया उसे
पर सबको अपने हृदय में बसाया गुरु ने!
**************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छ. ग.)
सर्वाधिकार सुरक्षित
27/07/2018
गुरुवार, 26 जुलाई 2018
कारगिल विजय दिवस पर एक छंद
जब कारगिल को था,शत्रुओं ने हथियाया
हिंदुस्तान ने मिशन,विजय चलाया था !
चोंटीयों से लड़ रहे,पाकी घुसपैठियों को
भारतीय वीरता का,झलक दिखाया था !
गरजे थे मिग और,गरजा बोफोर्स संग
महादेव के नारों से,दुश्मन थर्राया था !
अपना भूभाग छीन,भारती के लाडलो ने
शान से माँ भारती का,ध्वज फहराया था!!
मंगलवार, 24 जुलाई 2018
जब भी प्रीत करेगा कोई,,,
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
जब भी बरसे बूंदे बैरन,याद सताए साजन
के !
आस मिलन की मन में पाले,तड़पे बिन मनभा
-वन के!
जिसकी पीर वही है जाने,दूजा इसको क्या
समझे,
जब भी प्रीत करेगा कोई,गीत लिखेगा सावन के !!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
सोमवार, 23 जुलाई 2018
जिसके कविता का आँसू से,,,
जो अपने अंतस की पीड़ा,गीत बनाकर गाता है !
जिसके कविता का आँसू से,एक अनोखा नाता है !
जिसके शब्दों में है चिंतन,अपनी माटी की खातिर ,
ऐसा कवि ही काव्यजगत में,नाम अमर कर जाता है !!
भावों की स्याही से जो,,
*******************************
अंतस की पीड़ा को अपनी,गीत बनाकर गाता है !
भावों की स्याही से जो,कागज पे कुछ लिख जाता है !
आत्माकथा का लेखांकन,जो काव्यरूप में करता है,
ऐसा मानव ही जग में,साहित्यकार कहलाता है !!
********************************
बुधवार, 18 जुलाई 2018
सत्य का कोई तोल नही,,,
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
सभी चाहते सुंदरता को,सीरत का कोई मोल नही !
मतलब के रिश्ते है केवल,लबों पे मीठे बोल नही !
देशधर्म और नैतिकता से,सरोकार है किसको अब,
झूठ बिक रहा है लाखों में,सत्य का कोई तो नही!!
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
सुनिल शर्मा,"नील"🌿
सत्य का कोई तोल नही,,,
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
सभी चाहते सुंदरता को,सीरत का कोई मोल नही !
मतलब के रिश्ते है केवल,लबों पे मीठे बोल नही !
देशधर्म और नैतिकता से,सरोकार है किसको अब,
झूठ बिक रहा है लाखों में,सत्य का कोई तो नही!!
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
सुनिल शर्मा,"नील"🌿
मंगलवार, 17 जुलाई 2018
झूठ है बिकता लाखो में,,,,,
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
सभी चाहते सुंदरता को,सीरत का कोई मोल नही !
मतलब के रिश्ते है केवल,लब पे मीठे बोल नही !
देशधर्म और नैतिकता से,सरोकार है किसको अब,
झूठ है बिकता लाखो में,सत्य का कोई तोल नही!!
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
🌿 सुनिल शर्मा,"नील"🌿
सोमवार, 16 जुलाई 2018
बने पापा सहारा तुम,,,,
चंद पंक्तियाँ पापा को समर्पित,,,,
--------------------------
मेरे दुःख में मुझे हिम्मत,दिलाने कौन आएगा !
चिरागों सा मुझे जलना,सीखाने कौन आएगा !
फँसा जब भी भंवर में मैं,बने पापा सहारा तुम,
तुम्ही गर रूठ जाओगे,मनाने कौन आएगा !
--------------------------
सुनिल शर्मा"नील"C R
7828927284
तुम्ही गर रूठ जाओगे!
मेरे दुःख में मुझे हिम्मत,दिलाने कौन आएगा !
चिरागों सा मुझे जलना,सीखाने कौन आएगा !
फँसा जब भी भंवर में मैं,बनी "माँ"तुम सहारा हो,
तुम्ही गर रूठ जाओगी,मनाने कौन आएगा !
शुक्रवार, 13 जुलाई 2018
बस एक तू ही नही है!
"बस एक तू नही है"
;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
सब कुछ है पास मेरे
बस एक तू ही नही है ! !।!
कह देता हूँ भले सबको
जीवन मे सबकुछ सही है! !2!
पर रातों में याद कर तुझे
आँखें मेरी कई बार बही है! !3!
कैसा भाग्य है मेरा होकर
मुझसे जाने तू दूर कहीं है ! !4!
कैसे जान पाएगा भला तू
आँखे कैसे बिन तेरे रही है! !5!
धोखों को सहकर अपनो के,
जिंदगी यह कितने बार ढही है । !6!
जीवन भर रहना है तेरे बिन
वास्तविकता मेरी बस यही है! !7!
बुधवार, 11 जुलाई 2018
इसको भूमि नही माँ कहा कीजिये,,,,
-----------------------
"भारती"से सदा ही वफ़ा कीजिए !
"भूमि"इसको नही माँ कहा कीजिए !
पालकर,पोसकर है बनाया तुम्हे
उसका खाकर नमक न दगा कीजिए !!
-----------------------
खाकर नमक न दगा,,,
भूलकर न वतन से,,,,
------------------------
"भारती"से सदा ही वफ़ा कीजिए !
इसको भूमि नही माँ कहा कीजिए!
जिसने पाला है,पोसा है,बनाया तुम्हे
उसका खाकर नमक न दगा कीजिए !!
-----------------------
हेलमेट की आदत बनाइए,,,
हेलमेट की आदत बनाइए,,,,,
.......................................
वक्त से भले तनिक देर हो जाइए !
वाहन सदा संयमित होकर चलाइए !
आपकी सुरक्षा से परिवार की खुशी है ,
आज से हेलमेट की आदत बनाइए !!
.........................................
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया नगर
7828927284
सर्वाधिकार सुरक्षित
सोमवार, 9 जुलाई 2018
किताबों संग लोगों की पीड़ा,,,,,
कदम दर कदम तू,आगे बढ़ते रहना !
साहित्य में नूतन,इतिहास गढ़ते रहना !
मरकर भी अमर हो जाएगा तेरा नाम ,
किताबों संग लोगों की पीड़ा पढ़ते रहना!!
कदम दर कदम,,,,,
कदम दर कदम जो,आगे बढ़ा करते है !
सफलता के नूतन वो,शिखर चढ़ा करते है!
लक्ष्यपथ में नही डिगते तूफानों के आगे ,
वही तो अक्सर,इतिहास गढ़ा करते है !!
शनिवार, 7 जुलाई 2018
कल पर मत टाल पगले
जो बीत गया एक बार,कभी वह पल नही आएगा !
जो "आज" है पास तेरे,लौटकर कल नही आएगा !
जो करना है आज कर,कल पर मत टाल पगले,
आदत है यह बुरी,इससे कभी मंगल नही आएगा !!
तुम्हारे लिए
तुम्हारे लिए,,,,,
***********************
है मेरे पाप इतने कि मैं इनको ढो नही सकता !
है इतने दाग दामन पे कि उनको धो नही सकता !
लगी ठोकर स्वयं को जब तो जाना दर्द तेरा है ,
अभागा हूँ मैं इतना चाहकर भी रो नही सकता !!
आस इतनी है तुझसे मिलके दिल की बात कह लेता !
मै पश्चाताप के आँसू में संग-संग स्वयं बह लेता !
नही मैं चाहता कंटक बनू तेरी गृहस्थि का ,
तू अपने हाल में रहती मैं अपने हाल में रह लेता !!
नही जी पाऊंगा जो कहना है तूझसे दिल मे रखकर मैं !
सदा जलता रहूँगा होकर अतृप्त नफरत को सहकर मैं !
मुझे सम्भव हो तो तुम माफ कर उपकार कर देना ,
कहीं ऐसा न हो तृष्ना रहे अमर,मर जाऊं जलकर मैं!!
बुधवार, 4 जुलाई 2018
मुझे पाने विनय श्रीराम से,,,,
--------–------------------
गरजता है बरसता है,प्रणय मनुहार करता है !
मुझे पाने विनय श्री राम,से सौ बार करता है !
रहूँ जब तक सफर में मैं,न खाता है न पीता है ,
सनम मेरा मुझे खुद से,ज़ियादा प्यार करता है !!
----------------------------
सुनिल शर्मा"नील"
मंगलवार, 3 जुलाई 2018
मेरा दिलबर मुझे,,,
मुक्तक लोक
मुक्तक समारोह -16
आदरणीय अध्यक्षा-श्रीमती सुधा राजपूत दीदी
संरक्षक-श्री सुनिल शर्मा"नील"
व आदरणीय पटल को सादर समर्पित यह प्रयास!
प्रदत्त पंक्ति-
गरजता है बरसता है,प्रणय मनुहार करता है
--------–------
गरजता है बरसता है,प्रणय मनुहार करता है!
मेरे गुस्से के बदले वो,मृदु व्यवहार करता है!
रहूँ जब भी सफर में मैं,न खाता है न पीता है
मेरा दिलबर मुझें खुद से ज़ियादा प्यार करता है!!
-----------------
सुनिल शर्मा"नील"
सोमवार, 2 जुलाई 2018
जिन्हें अपना समझा,,,
रिश्तों को शिद्दत से,निभाता रहा मैं !
खुशबू वफ़ा की सदा,लुटाता रहा मैं!
जिन्हें अपना समझा,सारे गैर निकले,
सबको हँसाकर आंसू,बहाता रहा मैं!!
मैं सबका हुआ,,,
रिश्तों को शिद्दत से,निभाते रहा मैं !
वफ़ा की खुशबू को,लुटाते रहा मैं !
मैं सबका हुआ,कोई मेरा हो न सका,
फूल बाँटकर भी,काँटा पाते रहा मैं !!
शुक्रवार, 29 जून 2018
जिंदगी के रंगमंच में,,,
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
जिंदगी के रंगमंच में अपना किरदार
निभाते चलो
दोस्त हो चाहे दुश्मन सबको गले से
लगाते चलो!
बड़े भाग्य से मिला है हमें यह
मानव तन
परहित से इस चोले को सफल
बनाते चलो!
मिला है ज्ञान तो सीमित न रखो
खुद तक
अपनी रोशनी से नवदीपों को जग-
मगाते चलो!
बड़े तनाव में रहता है आदमी इस
दौर का
हो सके तो खुद हँसो और दूजों को
हँसाते चलो!
स्वार्थ में अंधें होकर नाश कर रहे हो
प्रकृति का
नष्ट होती पृथ्वी को बचाने वृक्ष तुम
लगाते चलो !
घेरकर चारागाह गौवंश छोड़ रहे मरने
सड़को पर
सिर्फ नारों में नही धरातल पर भी गौ
को बचाते चलो!
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
सुनिल शर्मा"नील"
बेमेतरा,7828927284
गुरुवार, 28 जून 2018
दिल की बात कलम से,,,,
खुद की धुन में बेखबर बहना सीखा दिया !
तन्हाई में भी उसने मुझे रहना सीखा दिया !
कुछ इस तरह धोखा दिया मोहब्बत में उसने ,
दिल की बात कलम से कहना सीखा दिया !!
पिता ने,,,,
खुद रहे एक जोड़ी में,मुझे महंगा परिधान दिलाया पिता ने !
नाम देकर अपना मुझे,दुनिया में सम्मान दिलाया पिता ने !
खुद रहे अभावों में पर,कभी किसी चीज की कमी न होने दी,
मैं तो नादान पंछी था,उड़ने को खुला आसमान दिलाया पिता ने !
न हो अब निर्भया सा कांड
जो आँखें घूरती है बेटियाँ,उन्हें फोड़ना होगा !
करे जो टिप्पणी भद्दी,सर उनके मरोड़ना होगा !
न हो अब निर्भया सा कांड,कोई भारत की भूमि में
उठे जो हाथ उनकी अस्मतों पर तोड़ना होगा !!
सोमवार, 25 जून 2018
फँसा मझधार में था मैं,,,
--------------------------
बड़ा तन्हा था जीवन मे,सहारा दे दिया उसने !
फँसा मझधार में था मैं,किनारा दे दिया उसने !
मेरे अधरों के बिसरे गीत,फिर से लौट आए है,
मोहब्बत देके पतझड़ को,बहारा दे दिया उसने !!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छ.ग.)
सर्वाधिकार सुरक्षित
बहारा दे दिया उसने.....
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बड़ा तन्हा था जीवन मे,सहारा दे दिया उसने !
फँसे मझधार को जैसे,किनारा दे दिया उसने !
मेरे अधरों के बिसरे गीत,फिर से लौट आए है ,
मुहब्बत देके पतझड़ को,बहारा दे दिया उसने !!
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शनिवार, 23 जून 2018
पगों से नाप लोगे
अगर जो ठान लो मन में,गगन को तुम झुका दोगे !
काट पर्वत के छाती को,"युवा"तुम पथ बना दोगे !
पगों से नाप लोगे बन,त्रिविक्रम पूरी सृष्टि को,
है तुममें वो अतुल शक्ति ,नया सूरज उगा दोगे!!
युवा साहस रखो
अगर जो ठान लो मन में,गगन को तुम झुका दोगे !
मरु में जल प्रवाहित कर,चमन सुख का बसा दोगे!
"युवा" साहस रखो गर,राम सा सागर सुखाने का
नही संशय उफनते ज्वार में सेतु बना दोगे !!
सोमवार, 18 जून 2018
समस्यापूर्ति
1. "प्यार करके वो तन्हा छोड़ गया।"
2. बिना हृदय में उतरे गहराई, भला जानोगे कैसे?
3. मुझे रह रहके तेरा मुस्कुराना याद आता है।
4. खुद रहे एक जोड़ी कपड़ों में तुम्हे मनचाहा परिधान दिलाया पिता ने!
5. जो दुःखों को सहकर भी हरदम मुस्काता है!
6. सफर में मिली ठोकरों ने हमें जीना सीखा दिया!
7. कभी कांटों की फसलें बो,नही कोई आम पाता है!
8. मिले कभी लोभ तो कर्तव्य पथ में,मत फिसल जाना!
9. है तेरे पाप इतने कि,कहीं भी धो न पाएगा!
10. तुम ऐसा स्वप्न हो जिसको,
भूलाना चाहता हूँ मैं!
11. अपने हिस्से का निवाला भी खिला देती है
12. अगर कमजोर हो धागे,तो बंधन छूट जाते है!
13. ठोकरों से संभलना हमें आ गया !
काँटो में रहके
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ठोकरों से संभलना हमें आ गया!
तूफानों में चलना हमें आ गया!
हर पग पर मिले इतने काँटे मुझे,
काँटो में रहके पलना मुझे आ गया !!
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-सुनिल शर्मा"नील"
मंगलवार, 12 जून 2018
रुलाकर तू मुझे,,,
है तेरे पाप इतने कि ,कहीं भी धो न पाएगा !
गुनाहों का तू यह बोझा,उम्रभर ढो न पाएगा!
मेरे आँखों को दुःखों का,समंदर बाँटने वाले,
रुलाकर तू मुझे खुद चैन से कभी सो न पाएगा !!
मेरे आँखों को,,,
है तेरे पाप इतने कि ,कहीं भी धो न पाएगा !
गुनाहों का तू यह बोझा,उम्रभर ढो न पाएगा!
मेरे आँखों को दुःखों का,समंदर बाँटने वाले,
रुलाकर तू मुझे खुद चैन से कभी सो न पाएगा !!
शनिवार, 9 जून 2018
सफर में मिली ठोकरों ने
गमों की आँच ने आँसुओं को पीना सीखा दिया !
तार-तार जिंदगी को मुस्कान से सीना सीखा दिया!
हम तो जीना भूल चुके थे जाने कबसे याद नही
सफर में मिली ठोकरों ने हमें जीना सीखा दिया !!
बुधवार, 6 जून 2018
तेरा श्रृंगार करके
तेरा श्रृंगार करके मन लुभाना याद आता है !
परस्पर रूठ जाना औ मनाना याद आता है !
जुदा होकर कभी तुझसे जुदा मैं हो नही पाया
मुझे रह-रह के तेरा मुस्कुराना याद आता है !!
रविवार, 27 मई 2018
ऐसे रविन्द्र भैया को,,,
अंधेरा लाख गहरा हो पर रवि रुकता कब है
जनता का हितैषी ,यह बन्दा झुकता कब है!
किसान हितो को लेकर सतत मुखर रहता है
उनके सुख दुख को सदा ही अपना कहता है!
कद ऊँचा है पर जमीन ही इसको भाता है
बड़ा सादा है चीला-चटनी छाँव से खाता है!
मौहाभाठा मातृभूमि,साजा जिनकी पहचान है
अधरों पर अल्हड़ मुस्कान ही जिनकी शान है!
कुछ जहाँ पद पाकर औकात भूल जाते है
रसूख का फायदा उठा सबको सताते है!
"शब्दवीर"नही ये कृतित्व से जाने जाते है
यह ऐसे नेता है जो दिलों में घर बनाते है!
धारदार शैली,सद्भाव ही इनकी पहचान है
बेदाग छवि हेतु विरोधियों में भी सम्मान है!
महाकाल भक्त है उनके धुन में रमें रहतें है
सच के अस्तित्व हेतु सदा ही जमें रहतें है
क्षेत्र की खुशहाली की सदा जो करते कामना है
ऐसे"रविन्द्र भैया"को जन्मदिन की शुभकामना है!!
सप्रेम-अमित शर्मा
9589898923