सोमवार, 18 जून 2018

समस्यापूर्ति

1. "प्यार करके वो तन्हा छोड़ गया।"

2. बिना हृदय में उतरे गहराई, भला जानोगे कैसे?

3. मुझे रह रहके तेरा मुस्कुराना याद आता है।

4. खुद रहे एक जोड़ी कपड़ों में तुम्हे मनचाहा परिधान दिलाया पिता ने!

5. जो दुःखों को सहकर भी हरदम मुस्काता है!

6. सफर में मिली ठोकरों ने हमें जीना सीखा दिया!

7. कभी कांटों की फसलें बो,नही कोई आम पाता है!

8. मिले कभी लोभ तो कर्तव्य पथ में,मत फिसल जाना!

9. है तेरे पाप इतने कि,कहीं भी धो न पाएगा!

10. तुम ऐसा स्वप्न हो जिसको,
भूलाना चाहता हूँ मैं!

11. अपने हिस्से का निवाला भी खिला देती है

12. अगर कमजोर हो धागे,तो बंधन छूट जाते है!

13. ठोकरों से संभलना हमें आ गया !

काँटो में रहके

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ठोकरों से संभलना हमें आ गया!
तूफानों में लना हमें आ गया!
हर पग पर मिले इतने काँटे मुझे,
काँटो में रहके पलना मुझे आ गया !!
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-सुनिल शर्मा"नील"

मंगलवार, 12 जून 2018

रुलाकर तू मुझे,,,

है तेरे पाप इतने कि ,कहीं भी धो न पाएगा !
गुनाहों का तू यह बोझा,उम्रभर ढो न पाएगा!
मेरे आँखों को दुःखों का,समंदर बाँटने वाले,
रुलाकर तू मुझे खुद चैन से कभी सो न पाएगा !!

मेरे आँखों को,,,

है तेरे पाप इतने कि ,कहीं भी धो न पाएगा !
गुनाहों का तू यह बोझा,उम्रभर ढो न पाएगा!
मेरे आँखों को दुःखों का,समंदर बाँटने वाले,
रुलाकर तू मुझे खुद चैन से कभी सो न पाएगा !!

शनिवार, 9 जून 2018

सफर में मिली ठोकरों ने

गमों की आँच ने आँसुओं को पीना सीखा दिया !
तार-तार जिंदगी को मुस्कान से सीना सीखा दिया!
हम तो जीना भूल चुके थे जाने कबसे याद नही
सफर में मिली ठोकरों ने हमें जीना सीखा दिया !!

बुधवार, 6 जून 2018

तेरा श्रृंगार करके

तेरा श्रृंगार करके मन लुभाना याद आता है !
परस्पर रूठ जाना औ मनाना याद आता है !
जुदा होकर कभी तुझसे जुदा मैं हो नही पाया
मुझे रह-रह के तेरा मुस्कुराना याद आता है !!

रविवार, 27 मई 2018

ऐसे रविन्द्र भैया को,,,

अंधेरा लाख गहरा हो पर रवि रुकता कब है
जनता का हितैषी ,यह बन्दा झुकता कब है!

किसान हितो को लेकर सतत मुखर रहता है
उनके सुख दुख को सदा ही अपना कहता है!

कद ऊँचा है पर जमीन ही इसको भाता है
बड़ा सादा है चीला-चटनी छाँव से खाता है!

मौहाभाठा मातृभूमि,साजा जिनकी पहचान है
अधरों पर अल्हड़ मुस्कान ही जिनकी शान है!

कुछ जहाँ पद पाकर औकात भूल जाते है
रसूख का फायदा उठा सबको सताते है!

"शब्दवीर"नही ये कृतित्व से जाने जाते है
  यह ऐसे नेता है जो दिलों में घर बनाते है!

धारदार शैली,सद्भाव ही इनकी पहचान है
बेदाग छवि हेतु विरोधियों में भी सम्मान है!

महाकाल भक्त है उनके धुन में रमें रहतें है
सच के अस्तित्व हेतु सदा ही जमें रहतें है

क्षेत्र की खुशहाली की सदा जो करते कामना है
ऐसे"रविन्द्र भैया"को जन्मदिन की शुभकामना है!!
                                सप्रेम-अमित शर्मा
                                    9589898923