रविवार, 26 फ़रवरी 2017

बेटा बेटी एक है

बेटा-बेटी एक है,कब समझेंगे लोग
मन में अपने व्यर्थ का,पाले बैठे रोग!

बनके रहना तू "कमल"

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माना जमाने की हवा खराब है
यहाँ सबके चेहरों पे नकाब है
फिर भी बनके रहना तू "कमल"
उसके खाते में सबका हिसाब है|
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
CR

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

नाम महाकाल तेरा

नाम महाकाल तेरा,,,,,,,,,
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कालों के भी काल तुम,नाम महाकाल तेरा
सत्य तुम्ही,शिव तुम्ही,सुंदर कहाते हो
अंग में भभूति और,सर्पों का श्रृंगार किए
हिय राम नाम लिए,धुनि को रमाते हो
पापन के नाश हेतु,रूप हनुमान लेते
सीता माँ की सुध लेते,लंका को जलाते हो
संकट में होती सृष्टि,तब विषपान कर
भोले मेरे "नीलकंठ",तुम बन जाते हो!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
24/02/2017
CR

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

छत्तीसगढ़ म बेंचही सरकार ह दारु,,,,,

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राजा ह प्रजा के टोटा मसकत हे
नियाव के भीतिया कइसे भसकत हे
छत्तीसगढ़ म बेचही सरकार ह दारु
कोन सोझ रेंगय जब सियाने भटकत हे
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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

विष पीकर शंकर ,,,

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शब्दों को धरातल पर लाता क्यों नहीं
अपने हिस्से का दीया जलाता क्यों नहीं
बहुत आसाँ है उठाना दूसरों पे उंगली
विष पीकर शंकर बन जाता क्यों नही?
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छ. ग.)
7828927284

मत करो पागल

2122 2122 212
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मत करो घायल नजर के तीर से
मत करो पागल मुझे तुम पीर से
टूटता आया सदा हूँ इश्क में
मत भरो अब इन दृगों को नीर से
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अपने हिस्से का "दीया"

अपने हिस्से का दीया.......
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मानव होकर मानवता निभाता क्यों नही
किसी रोते हुए को कभी हँसाता क्यों नही
वैसे तो बड़ी शिकायते है जमाने से
अपने हिस्से का दीया खुद जलाता क्यों नही?
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
9755554470
रचना-14/02/2017