मंगलवार, 21 मार्च 2017

जबसे तुमको,,,,

जबसे तुमको मेहरबान पा
लिया है
मानो परिन्दे ने आसमान पा
लिया है
सूखे अरमान हरे होने लगे
है
चमन ने अपना बागबान पा
लिया है

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ आठ लाख दान करने पर उन्हें नमन करती मेरी रचना,,,,,,,

रियल लाइफ हीरो अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ 8 लाख देने पर उनकी देशभक्ति को नमन करती मेरी ताजा रचना................. रचनाकार-सुनिल शर्मा"नील" थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़) 7828927284 ******************************** कोई सितारा "पीके" बन धर्मों का मान गिराता है कोई बलात्कार के पीड़ितों का उपहास उड़ाता है कोई कहता है स्वदेश में बीवी को भय लगता है कोई कहता गौ माँस खाने से ही जी भरता है पाक सितारों को लेकर कोई तरफदार बन जाता है कोई शहादत पर सैनिक के पी शराब मुस्काता है ऐसे में जब आधा बॉलीवुड कौरव दल लगता है "अक्षय "है जिसमें भारत को अपना अर्जुन दिखता है रील लाइफ के हीरों ने रियल में कर दिखलाया है सुकमा के पीड़ितों के दर्द को अपना दर्द बताया है खोल खजाना वीरों को जिसने अपना सम्मान दिया औरों ने तो सिर्फ भुनाया कौड़ी भी न दान किया नाज है तुमपे हमें खिलाड़ी सदियों तक तेरा मान रहे तुझको स्नेह मिले इतना कि सारे जग में शान रहे तेरे कर्मों से निश्चित आजाद,भगत हर्षित होंगे तेरे कर्मों से निश्चित लाखों इक दिन प्रेरित होंगे नील करे आह्वान युवा हीरो की हम की पहचान करे देश,धर्म की बात करे उनका ही हम सम्मान करें देखे फ़िल्में उनकी ही जो भारत माँ के लिए जीयें ना कि उनकी जो भारत के मर्यादा पे होंठ सीए देशभक्ति के गंगा में सुनलो मिलकर बहना होगा भारत में रहना है तो वन्दे मातरम कहना होगा! ******************************** आप सब मित्रों से करबद्ध निवेदन है रचना को मूल रूप में बिना काट-छाँट के शेयर करें,,नाम काटकर किसी कवि के श्रम व सृजन का अपमान न करें,,,..जय हिंद

बुधवार, 15 मार्च 2017

डरना न आफरीन


यह तालिबान नहीं,मेरा हिंदुस्तान है
परिन्दों का सबसे प्यारा आसमान है
डरना न आफरीन फतवों से कभी तुम
उड़ते रहने से जग में तेरी  पहचान है|

रंग लेता हूँ

"रंग लेता हूँ खुद ही चेहरे को
गुलाल से
ये सोंचकर कोई मेरी तन्हाई
न पढ़ ले"

मंगलवार, 7 मार्च 2017

चाहूँ मै रंगना तुमसे ,,,,


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हाथों में है रंग सभी के,खुद को कहाँ
छुपाऊँ रे
चाहूँ रँगना तुमसे ही मैं ,किस किस को
समझाऊँ रे
रंग न जाए कोई दूजा,कान्हा अब तो
आ जाओ
भंग पिए सब रंग लगावत,कैसे बचकर
जाऊँ रे
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सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)

                     

सोमवार, 6 मार्च 2017

क्यों होता गुमराह-दोहा

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ढूँढा करते है जिसे,इतउत लेकर चाह
रहता मन में ही कहीं,क्यों होता गुमराह!
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छत्तीसगढ़)
7828927284

नशा फोन का,,,,,,,

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रावण रूप बदलकर वापस आया है
घर घर में अपनी माया फैलाया है
रिश्तें घायल है उसकी दानवता से
सबके ऊपर नशा फोन का छाया है|
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
06/03/2017
CR