जिधर देखो उधर आतंक का फैला कहर यारों !
सुरक्षित है नही इनसे कोई गाँव-शहर यारों !
कहूँ कैसे भला भाई उन्हें जो देश को फूँके ,
फिजाओं में जिन्होंने देश के घोला जहर यारों !!
रविवार, 22 दिसंबर 2019
कहूँ कैसे भला भाई उन्हें,,,,
रविवार, 15 दिसंबर 2019
जामिया या हो बंगाल new
दिल्ली को डराने वाले,गुंडों को पकड़कर
शीघ्र इन पागलों को उपचार दीजिए !
जिनको चढ़ा बुखार,उपद्रव करने का
उनके सिरों के ज्वर को उतार दीजिए!
सड़कों पे भीड़ से जो दंगे करवा रहे है
ऐसे राजनेता को जूते हजार दीजिए !
जामिया या हो बंगाल जहाँ भी देशद्रोही दिखे
उनको पकड़ सीधे गोली मार दीजिए!!
कवि सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
सर्वाधिकार सुरक्षित
जामिया या हो बंगाल
दिल्ली को डराने वाले,श्वानों को पकड़कर
शीघ्र इन पागलों को,उपचार दीजिए !
चढ़ा हुआ जिन्हें ज्वर,उपद्रव करने का
उनके सिरों से ये ज्वर उतार दीजिए!
सड़कों पे भीड़ से जो,दंगे करवा रहे है
ऐसे राजनेता को,जूते हजार दीजिए !
जामिया या हो बंगाल,जहाँ भी देशद्रोही दिखे
उनको पकड़ सीधे,गोली मार दीजिए!!
।
मंगलवार, 10 दिसंबर 2019
गोंडवाना वीर नारायण को प्रणाम है,,,
गोरों के विरुद्ध जहाँ फूँका गया था बिगुल
सोनाखान के हरेक कण को प्रणाम है!
शौर्य देख जिनका थी,भारती भी मुसकाई
वीरता के उस हर क्षण को प्रणाम है!
भूख व अकाल से थी,प्रजा हुई तप्त तब
अन्न को खिलाने वाले प्रण को प्रणाम है!
भारती के रक्षा हेतु बलिदान होने वाले
गोंडवाना वीर नारायण को प्रणाम है!!
शनिवार, 7 दिसंबर 2019
पापियों में मैगजीन भरना जरूरी है
न्यायपालिका की खाक,छानके जो
थक गए
पीर उन पीड़ितों की,हरना
जरूरी है!
हाल जो हुआ दिशा के,आतताइयों
का वही
निर्भया के दोषियों का,करना
जरूरी है!
फाइलों में दबनें न,पाए बेटियों
की चीख
पापियों में मैगजीन,भरना
जरूरी है !
बेटियों के अस्मतों से,खेलते है
आए दिन
उनसे कहो कि अब,डरना
जरूरी है !!
शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019
सज्जनवार होना चाहिए
हौसले बुलंद जब पापियों के होने लगे
तब एक वार जोरदार होना चाहिए !
कलियों की जिंदगी को जो जलातें सड़को पे
जिंदगी में उनके भी खार होना चाहिए !
न्यायपालिका से जब घिस जाए चप्पलें तो
एनकाउंटर न्याय का आधार होना चाहिए !
भारत की बेटियों की एकमत मांग यही
चौकी में हरेक सज्जनवार होना चाहिए !!
बुधवार, 4 दिसंबर 2019
राममय छत्तीसगढ़
राममय छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के हर कण-कण में तन, में मन में
बसतें राम
पर्वत धरा और वृक्षों में श्वांस श्वांस में
बसतें राम!
माँ कौशिल्या की धरती यह,जनजीवन में
यहाँ के राम
सोंढूर,पैरी,शिवनाथ के ,कल-कल बहते
जल में राम!
राजिम का पावन तट देखो,रतनपुर में
देखो राम
तुरतुरिया के पावनधाम में,दंडकारण्य में
हँसते राम!
लोककला के संगीतों में मांदर के थापों
में राम
रामसप्ताह के दोहों में ,जसगीतों के
लय में राम!
राम यहाँ के अभिवादन में"काठा"के
नापों में राम
"मितानी"की परंपरा में संस्कारों में
राम ही राम!
गर्व राम छत्तीसगढ़ियों के ,मेहनत की
खुशबू में राम
जन्म से लेकर अंतिमयात्रा के कर्मों में
राम ही राम!!
कवि सुनिल शर्मा "नील"
7828927284
देखो फिर से आई होली
देखो फिर से आई "होली"
भेदभाव का करें शमन यह संदेशा
लाई होली
रंगप्रीत से रंग दो सबको देखो फिर से
आई होली!
पके अन्न के मीठे दानें,बौराई अमियाँ
की झोली
कोयल रात बिरात कूकती मीठा तू भी
बोल रे बोली!
हरें,नारंगी ,लाल व पीले कितने रंग ले
आई होली
अंदर बाहर ऊपर नीचें खुशियाँ बनकर
छाई होली!
वृंदावन में छा गई मस्ती,राधा की भी
भीगी चोली
कान्हा दौड़ें ले पिचकारी,संग संग गोपों
की टोली!
नील कहें प्रतीक व्यसन का कभी न बनने
पाए होली
हर्ष,उमंग,उत्साह,प्रेम से बस पहचानी
जाए होली11
कवि सुनिल शर्मा "नील"
7828927284
निर्भया की पीड़ा
निर्भया की पीड़ा
शर्मसार हुई है मानवता फिर अबला के
चित्कारो से
फिर हुई है शिकार कोई वासना के कुत्सित
विकारों से!
उजड़ गया है आज फिर किसी बेटी का
चमन
जीते जी आज हार गया है फिर किसी
का जीवन!
वह रोती गिड़गिड़ाती और चिखती रही पर न
जागी दैत्यों की चेतना
कैसे कहूँ कहा नही जाता उस अबला की
मुझसे वेदना!
सन्नाटे की हरेक आहट से घबरा जाया
करती है
भय के कारण कोने में डरकर सिमट जाया
करती है!
वो भयावह मंजर अक्सर उसे डराया
करतें है
गंदी मानसिकता के चलचित्र दिखाया
करतें है!
झूल रही है जिंदगी उसकी अस्पताल
में
गूंजा करते थे हँसी कभी घर के दीवाल
में!
बाबा की आंखें पाषाण और माँ के कंठ
अवरुद्ध है
द्रौपदी के चिर बचाने वाले कन्हैया वे आपपर
भी क्रुद्ध है!!
कवि सुनिल शर्मा "नील"
7828927284
मंगलवार, 3 दिसंबर 2019
शस्त्र भी दिलाइए,,,,
हर गली घूम रहे,दुशासनों के है झुंड
बहु और बेटियों को,इनसे बचाइए !
चीर को बचाने नही,आएंगे गोविंद अब
आत्मरक्षा हेतु उन्हें,सबल बनाइए!
अबला नही है नारी,दुर्गा का रूप है वें
बालपन से उन्हें ये,घुट्टियाँ पिलाइए!
महँगे दिलाये सेल,उनको परन्तु आप
संग-संग कोई उन्हें,शस्त्र भी दिलाइए!!
शनिवार, 30 नवंबर 2019
किसी बेटी की हत्या,,,,
स्वार्थ के बादलों से संवेदनाओं की रोशनी छनती कहाँ है
सियासत की टेंट बिना मतलब कही तनती कहाँ है !
तैमूर के डायपर पर दिनरात चलती है ब्रेकिंग न्यूज यहाँ,
किसी बेटी की हत्या देश में खबर अब बनती कहाँ है !
शनिवार, 23 नवंबर 2019
महाराष्ट्र राजनीति
हाथ में आया हुआ सबकुछ फिसल गया !
रात का अंधेरा पूरा अरमान निगल गया !
बाराती रातभर नाचते गाते रहे शादी में,
सुबह होने पर पता चला दूल्हा बदल गया !!
शुक्रवार, 22 नवंबर 2019
तरसना भी जरूरी है,,,,
गमों के मेघ आँखों से बरसना भी जरूरी है !
सदा रोना नही अच्छा हरषना भी ज़रूरी है !
जरूरी है नही चाहो जिसे वह सब मुकम्मल हो ,
सदा पाना नही अच्छा तरसना भी जरूरी है !!
गुरुवार, 21 नवंबर 2019
सबसे ऊपर हम रखें प्यारा वतन अपना,,,
भले ही खाक हो जाए ये मिट्टी का
बदन अपना !
कभी उजड़े नही लेकिन ये सुंदर सा
चमन अपना !
न जाति और न मजहब न कोई प्रांत
पहले हो ,
सदा ही सबसे ऊपर हम रखे प्यारा
वतन अपना!!
शनिवार, 9 नवंबर 2019
रामलला पर दोहावली,,,,,,
सपने देखे थे कभी,आज हुए साकार !
मंदिर मेरे राम का,लेगा अब आकार !
खुशियों से भींगे नयन,फूटी है जलधार,
रामलला को मिल गया,मंदिर का अधिकार!!
महलों में थे हम सभी,तंबू में थे राम
पाने में वर्षों लगें,उनको अपना धाम
प्रभु जी के वनवास का,आज हुआ है अंत
नमन सभी के त्याग को,क्या नेता क्या संत
मना रहा है दीवाली,भारत दो-दो बार
न्यायालय के न्याय को,नमन सैकड़ो बार
हिन्दू-मुस्लिम धैर्य को,शत-शत मेरा प्रणाम
अनुशासन अरु प्रेम का,दिया गजब पैगाम
भड़काए जो धर्म पर,उनको मिले जवाब
पसन्द नही यह देश तो,पाक में रहें जनाब
यह कलाम का देश है,रहें यहाँ रसखान
जिनको भारत देश ने,सदा दिया है मान
जिन्ना जैसा व्यर्थ न,करिए आप प्रलाप
भारत सारा जानता,कितने विषधर आप!!
शुक्रवार, 8 नवंबर 2019
रियासत की खातिर सियासत बदल दी,,,
कब किसका बदल जाए मन पता नही!
यहाँ कौन मलिन है कौन पावन पता नही !
रियासत की खातिर सियासत बदल दी,
इसमें दोस्त कब बन जाए दुश्मन पता नही!!
सियासत के बिसात में,,,
यहाँ कब किसका बदल जाए मन पता नही!
कौन यहाँ मलिन और कौन पावन पता नही !
सियासत के इस खेल में स्वार्थ ही सबकुछ है,
इसमें दोस्त कब बन जाए दुश्मन पता नही!!
गुरुवार, 7 नवंबर 2019
जिनके नाम लेखन से पत्थर भी ,,,,
दशरथ के पितृत्व,सीता मैया के सतित्व
भरतलाल के महान,प्रण को प्रणाम है !
राम जी के प्रियवर,वीरों में जो है प्रवर
शेषनाग के स्वरूप,लक्ष्मण को प्रणाम है!
भाइयों में है कनिष्ठ,वीर व कर्तव्यनिष्ठ
धीर वीर व गम्भीर,शत्रुहन को प्रणाम है!
जिनके नाम लेखन से,पत्थर भी तैरते है
ऐसे श्रीराम जी के,चरन को प्रणाम है!!
रविवार, 3 नवंबर 2019
आज दिल्ली की कल हमारी,,,,,
आज दिल्ली की कल हमारी बारी है !
हल कुछ नही आरोप प्रत्यारोप जारी है !
गैस चैम्बर बनता जा रहे है शहर सारे ,
यह विकास है या विनाश की तैयारी है !!
रूप घनाक्षरी-रोटियाँ भले ही खाले घास के,,,,
भारती के वीरपुत्र,रण में बहाते लहू
भारती के दूध को,लजाया नही करते
रणभू में बोलती है,शौर्य उनकी सदा ही
शत्रुओं को पीठ वे,दिखाया नही करतें
जीतता पराक्रम या,वरते है काल को वे
स्वाभिमान को कभी,गँवाया नही करते
रोटियां भले ही खा लें,घास के परन्तु 'राणा'
शत्रु के समक्ष सिर,झुकाया नही करते !!
रोटियाँ भले ही खाले घास के,,,,
भारती के वीरपुत्र,रण में बहाते लहू
भारती के दूध को,लजाया नही करते
रणभू में बोलती है,शौर्य उनकी सदा ही
शत्रुओं को पीठ वे,दिखाया नही करतें
जीतता पराक्रम या,वरते है काल को वे
स्वाभिमान को कभी,गँवाया नही करते
रोटियां भले ही खा लें,घास के परन्तु 'राणा'
शत्रु के समक्ष सिर,झुकाया नही करते !!
शुक्रवार, 1 नवंबर 2019
तुम वतन में भाईचारा
परस्पर लड़ना नही चमन गुलजार बनाये रखना!
अमन व सुकून का महकता संसार बनाये रखना!
मैं डटा रहूँगा अंतिम श्वास तक सीमा की रक्षा में
तुम वतन में भाईचारा का व्यवहार बनायेरखना!!
कवि सुनिल"नील"
7828927284
शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019
जलाएँ एक दीप उनके लिए,,,,
वतन के दीपक में कर्तव्य का तेल डाला करतें है !
जिनके दमपर हम कल की उम्मीदें पाला करतें है !
आहुति देतें है अपनी खुशियों का जो हमारे लिए ,
जलाएँ एक दीप उनके लिए जो देश उजाला करतें है!
गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019
जन्मदिन की बधाई नंदिनी
भावों का आवेग है उसमें
तितली जैसी चंचल है
अल्हड़ है बदमाश है थोड़ी
पर गंगा सी निर्मल है
हो जाती है सजल कभी
पर उसको हँसना ही भाता है
उसके अधरों से मुस्कान का
एक अटूट सा नाता है
मुझको मेरे दुखो पर वह
देती अक्सर सम्बल है
कहता है यह कौन मूर्ख
कि नारी होती दुर्बल है
नही जानता क्या है मेरी
दोस्त है या फिर कोई परी
पर बातें उससे करके
होती खुशियों की बेल हरी
आज जन्मदिन पर उसके
मेरे इष्ट अरदास यही
अपनी नन्दिनी को हरदम
कभी देना दुःख की चोंट नही!!
प्यार तू अपार दे,,,
अंधकार में न कहीं,गुम जाए तेरा पुत्र
उंगली पकड़के माँ, मुझको उबार दे !
जात-पात,ऊंच-नीच, के गिरा दीवार सारे
बैर भाव को मिटाके, प्यार तू अपार दे !
बनके कटार करे, देशद्रोही का सँहार
लेखनी को शारदे प्रखर ऎसी धार दे !
सच को सदा ही लिखे,स्वार्थ में कभी न बिके,
राष्ट्रहित में ही मेरी लेखनी को वार दे !!
शनिवार, 19 अक्टूबर 2019
मौन भला क्यों बैरागी दिखलाई देता है,,,,
यूपी का मौसम खूनी फागी दिखलाई देता है !
दामन तेरा अब हमको दागी दिखलाई देता है !
मांद में घुसकर देख श्रृंगालों ने मारा है सिंह कोई,
तब तेरा ये मौन भला क्यों बैरागी दिखलाई देता है !!
गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019
नील के सजल-6
नील के सजल-6
विधा-सजल
मात्राभार-20
समांत-अड़ा
पदान्त-है
*-मात्रापतन
इधर यह अड़ा है ,उधर वह अड़ा है 20
ये*निर्णय करे कौन, कितना बड़ा है 20
दोनों के हैं तर्क दावे कई हैं 20
संघर्ष मंदिर-मस्जिद पे कड़ा है 20
आती है लज्जा स्वयं आज हमको 20
स्वयं राम अपराधी* बनकर खड़ा है। 20
शुभंकर सभी चिन्ह करते प्रमाणित 20
मंदिर ही था जो कि नीचे गड़ा है 20
ये मन्दिर नही आम, है जन्मभूमि 20
वो* क्यों पूछते हैं यहां क्या जड़ा है। 20
नक्शे को यूँ फाड़ना क्या दिखाये 20
झूठ का* निश्चित ही फूटता घड़ा है!! 20
कवि सुनिल "नील"
7828927284
थान खम्हरिया,बेमेतरा(छत्तीसगढ़)
प्रेम को आपने व्यापार कर दिया---नील के सजल
विधा-सजल
मात्राभार-22
समांत-आर
पदान्त-कर दिया
आपने खुशियों को तार-तार कर दिया22
प्रेम को भी आपने व्यापार कर दिया22
समझा कि प्रेम करके हम साथ चलेंगे 22
प्रेम में ही आपने क्यों वार कर दिया22
जीवन बना दिया है रसहीन आपने22
पाषाण मुझे ,खुद को रसधार कर दिया
पहले हृदय के तार से हृदय जोड़ कर 22
क्यों दिलों के बीच में दीवार कर दिया 22
समझाऊं अर्थ प्रेम का* कभी तुम्हें प्रिये 22
जिसकी वजह से* दृष्टि आर -पार कर दिया22
कवि सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया
7828927284
सादर समीक्षार्थ
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019
नील के सजल-5
विधा-सजल
मात्राभार-22
समांत-आर
पदान्त-कर दिया
खुशियों को आपने तार-तार कर दिया22
प्रेम को भी आपने व्यापार कर दिया22
समझा था हमने जीवनसाथी तुम्हे 22
प्रेम करके किसतरह का वार कर दिया22
चुसकर रस समूल इस जीवन का तुमने22
मुझे पाषाण खुद को रसधार कर लिया
हृदय से तार हृदय के पहले जोड़कर 22
बाद मध्य हदयों के दीवार कर लिया 22
क्या समझे अर्थ प्रेम का कभी नादान 22
जिसने हमें भूलके निस्तार कर लिया22
कवि सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया
7828927284
नील के सजल-4
विधा-सजल
मात्राभार-18
पदान्त-रहना
समांत-अते
दुख जैसा भी हो हँसते रहना
सदा सत्य पथ में चलते रहना
बाधाएं आती है आने दो
साहस से आगे बढ़ते रहना
आशाएं लाखों हैं आँखों में
नित नवल प्रतिमान गढ़ते रहना
रहता गुलाब जैसे शूलों में
तुम भी उसी तरह पलते रहना
तूफानों से कभी मत घबराना
लड़कर दीपक सा जलते रहना !!
कवि सुनिल"नील"
7828927284
घनाक्षरी-तिरंगा नही छोड़तें,,,
सीमाओं के शेर हम एक बार प्रण लेते
साँस थम जाने तक प्रण नही तोड़ते
महाकाल के है भक्त काल से न घबराते
काल से भी लड़ जाते मुख नही मोड़ते
परिवार से भी बड़ा फर्ज है हमारे लिए
स्वार्थ के कभी भी कोई रिश्तें नही जोड़तें
प्राण छूंट जाए भले शत्रुओं से जूझने में
पर हरगिज ये तिरंगा नही छोड़ते !!
सोमवार, 14 अक्टूबर 2019
नील के सजल-3
चोंट जब भी हमें है करारा मिला
द्वार पर तेरे हमको सहारा मिला
प्रेमजल से तेरी प्यास मेरी बुझी
किंतु जग ये सदा हमें खारा मिला
कोशिशें सबने की डुबाने की हमें
इक तुझमें ही हमको किनारा मिला
था अंधेरा चहुओर जब भाग्य में
आपके रूप में एक नजारा मिला
पथ में जीवन के था अकेला बहुत
साथ तेरा है हमको न्यारा मिला !!
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019
थान खम्हरिया में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन आज
"थानखम्हरिया में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन आज"
सरस्वती उत्सव समिति वार्ड क्रमांक 3 ,थानखम्हरिया द्वारा भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व संगीत संध्या का आयोजन दिनांक(03/10/2019,गुरुवार)को सिन्हा प्रेस के सामने रखा गया है!इस आयोजन हेतु आयोजन समिति सरस्वती उत्सव समिति व युवा जागरण मंच द्वारा प्रचार-प्रसार की सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है!साहित्य नगरी के श्रोताओं व नागरिकों में आयोजन को लेकर बहुत उत्साह है!कुछ माह पूर्व नगर में आयोजित वायस ऑफ खम्हरिया के प्रतिभागी गायक जो फाइनल तक पहुंचें उन सुमधुर गायकों का कार्यक्रम कराओके संगीत संध्या भी शाम 6 से 8 बजे रखा गया है तत्पश्चात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रात्रि 8 से देर रात्रि तक होगा!इस कवि सम्मेलन में देश के नामी कवि काव्यपाठ करेंगे व हास्यव्यंग्य व काव्यरसों से सबका मनोरंजन करेंगे!आमंत्रित कवियों में देश के विख्यात कवि अमित दुबे(झारसुगुड़ा,उड़ीसा),भावेन्द्र डहरवाल(बालाघाट,मध्यप्रदेश),मनोज शुक्ला(इलाहाबाद),कवयित्री मीरा मृदु(बिलासपुर),रामानंद त्रिपाठी(बेमेतरा) तथा नगर के कविगण राजकमल राजपूत,कमल शर्मा व सुनिल शर्मा "नील"काव्यपाठ करेंगे!इसी तरह कराओके गायकों में भीखू यादव,सुभाष पाटिल,कृष्णा वैष्णव,राकेश तिवारी,अक्षय दुबे,बलराम ठाकुर,अरमान मलिक व सूरज तिवारी होंगे!सोशल मीडिया,फ्लेक्स व मौखिक प्रचार के माध्यम से नगर में इस कार्यक्रम का प्रचार हो चुका है!सभी को बस 4 अकटूबर की प्रतीक्षा है!इस आयोजन में नगर के सभी सामाजिक व संस्थाओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है इन सहयोगी संस्थाओं में माँ भारती सेवा मंच व वस्त्रदान समिति,थान खम्हरिया,श्री साईनाथ फाउंडेशन थानखम्हरिया,नई सोंच नई पहल थान खमरिया प्रमुख रूप से है!विदित हो कि साहित्य नगरी के नाम से विख्यात थान खम्हरिया में बहुत से कविगण है और पूरे छत्तीसगढ़ में एक अलग पहचान है जो अपने अपने स्तर पर थान खम्हरिया का नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन कर रहे है!आमंत्रित कवियो संग नगर के कवियों व गायको के इस अद्भुत समागम का यह अनोखा कार्यक्रम इससे पहले आजतक एक साथ आयोजित नही हुआ है!
रविवार, 29 सितंबर 2019
नील के सजल-2
विधा - सजल
✍समांत - *आर*
✍पदांत - जगदम्बे
मात्राभार-
आए तेरे दर पे सवाली बेड़ापार करो जगदम्बे
बिन तेरे न कोई अपना सबका उद्धार करो जगदम्बे
आतंकी करतूतों से कितनी त्रस्त है देखोभारत भू
भारमुक्त करने इसे दुष्टों का संहार करो जगदम्बे
भूखों को भोजन मिल पाए और वंचित को सम्मान मिले
भेदभाव का नाश हो भू से वह संसार करो जगदम्बे
सुरभित हो खुशियों से हर घर और गिरे द्वेष की दीवारें
भ्रष्टाचारमुक्त देश बने वह चमत्कार करो जगदम्बे
केवल नौ दिन पूजी जाए क्यों जब नारी हैशक्तिरूपा
नारी हेतु सब नयनों में शुचिता संस्कार
भरो जगदम्बे
सारे चारागाह सिमट गए गौ भटक रही है
सड़को पर
हित में गौ माता की फिरसे पुनः अवतार धरो जगदम्बे
विश्वगुरु हम पुनः बनें ध्वज चहुदिशी अपना फिर लहराए
भारत के जनमन की यही विनती स्वीकार करो जगदम्बे!!
शनिवार, 28 सितंबर 2019
मैं तो दिनमान हूँ,,,,
ये अंधेरें मुझे रोक पाएँगे क्या !
कर्मपथ से मुझे ये डिगाएँगे क्या !
मैं तो दिनमान हूँ न रुकूँगा कभी,
बनके बादल मुझे ये छिपाएँगे क्या !!
शुक्रवार, 27 सितंबर 2019
परिस्थितियों के अनुकूल,,,,
बैरियों के लिए शूल बनना सीख लो !
अपनों के लिए फूल बनना सीख लो!
बड़ी कठिन होगी यह जीवन की डगर ,
परिस्थितियों के अनुकूल बनना सीख लो!
बुधवार, 25 सितंबर 2019
सोचकर ये वफ़ा,,,,
अश्रु छुप छुप सदा हम बहाते रहें !
चोंट खाकर सदा मुस्कुरातें रहें !
साथ छोडूंगा न ये था वादा मेरा ,
सोचकर ये वफ़ा हम निभातें रहें !!
नील के सजल-1
भारत माँ की सेवा में जीवन अर्पित करना होगा
राष्ट्रवाद के सुप्तभाव को फिर जीवित करना होगा!
कार्य करें ऐसा जिससे भारत माँ का सम्मान बढ़ें
भगत-शिवा के आदर्शों को अंगीकृत करना होगा !
भेदभाव व जात,रंग के द्वेष न हो कोई जिसमें
ऐसी फूलों की वरमाला हमें सृजित करना होगा
प्रदूषण से विनष्ट हो रही सुन्दरता इस धरती की
इसके संरक्षण से भूमि को आल्हादित करना होगा!
ताप से पश्चिम की कोई न पौध बाग के मुरझाए
संस्कारों से "नील"हमें उसको सिंचित करना होगा!!
सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़)
सोमवार, 23 सितंबर 2019
सच को सदा
राजदरबारों के कभी प्रशस्ति गान नही
लिखूंगा !
कलम से जयचंदों का सम्मान नही
लिखूंगा !
चाहे चुनवा दिया जाऊं सच को सदा
सच लिखूंगा मैं,
भूलकर भी अकबर को मैं महान नही
लिखूंगा!!
जो बाहर से सुखी
जो बाहर से सुखी,सम्पन्न व सम्भ्रान्त रहतें है !
वो अंदर से बड़े मायूस और एकांत रहतें है !
निकल जाती है उनकी जिंदगी कागज कमाने में ,
अंत में कोसतें खुद को व अक्सर शांत रहतें है !!
सोमवार, 16 सितंबर 2019
कुण्डलियाँ-नोकझोंक
नोकझोक है जिंदगी,का आवश्यक अंग
जीवन में भरता यही,है सतरंगी रंग
है सतरंगी रंग,इसे जो मन में लेता
करता खुद की हानि,खुद को कष्ट है देता
कहे नील कविराय,न तिल को ताड़ बनाओ
जीवन एक उत्सव,इसे तुम रोज मनाओ!!
कुंडलियाँ-नोकझोंक
नोंकझोंक है जिंदगी,का आवश्यक अंग
इससे जीवन चित्र में,है सतरंगी रंग
है सतरंगी रंग,इसे जो मन में लेता
करता खुद की हानि,खुद को कष्ट है देता
कहे नील कविराय,न तिल को ताड़ बनाओ
जीवन एक उत्सव,इसे तुम रोज मनाओ !!
शनिवार, 14 सितंबर 2019
बोकर बबूलों को नही कोई आम पाएगा,,,,
बिना मतलब किसी का दिल कभी जो भी दुखाएगा !
सदा जीवन में वह खुद भी यहाँ आँसू बहाएगा !
नियम कुदरत का है बाँटोगे जो वह लौट आता है,
कभी बोकर बबूलों को नही कोई आम पाएगा !!
ममत्व की है यह भाषा
हिंदी से पहचान है,हिंदी से सम्मान
हिंदी से संस्कार है,हिंदी पर अभिमान!
हिंदी पर अभिमान,ममत्व की है यह भाषा
अक्षर अक्षर है मंत्र,प्रेम की यह परिभाषा
कहे "नील"कविराय,करे न कोई दिखावा
आओ धरातल पर इसे मिल दें बढ़ावा !!
मंगलवार, 10 सितंबर 2019
गणराज काज आप ऐसा वर दीजिए,,,,
कलह व क्लेश परिवेश में न देश के हो
गणराज काज आप ऐसा कर दीजिए !
राष्ट्र के लिए जिए व राष्ट्र के लिए ही मरें
ऐसा सबमें पवित्र भाव भर दीजिए !
भूख से मरे न कोई ,बेटियाँ न डरें कोई
भारतभूमि से सारे दुःख हर लीजिए !
किसानों को स्वाभिमान,नारी को मिले सम्मान
ऐसा हो स्वदेश मेरा ऐसा वर दीजिये !!
कवि सुनिल शर्मा"नील"
8839740208
शनिवार, 7 सितंबर 2019
परिश्रम जो किया इसरो ने एकदिन रंग लाएगा,,,,
हमें विश्वास है यह तप कभी न व्यर्थ जाएगा !
परिश्रम जो किया इसरो ने एकदिन रंग लाएगा!
अरे ये चंद्र क्या सूरज भी एकदिन नाप लेंगे हम,
हमारी जीत पर यह विश्व तब ताली बजाएगा !!
शुक्रवार, 6 सितंबर 2019
जहाँ गुरु देशहित बलिदान देतें है,,,
शौर्य से भरी हुई है भारत की पुण्यभूमि
जहाँ गुरु देशहित बलिदान देतें है !
कभी गुरु गोविंद सा पुत्रों की आहुति देतें
और कभी बंदा जैसा देहदान देतें है !
कभी रामदास और कभी वे चाणक्य बन शिवा,चंद्रगुप्त जैसे बलवान देते है !
भारती का देश यह भारत कहाता क्योंकि
लाखो गुरु मिल इसे स्वाभिमान देतें है !!
केशव बन जातें हैं,,,,
रज जिनके चंदन है
ऐसे चरणों में
मेरा शत शत वंदन है!!
गुरुदेव कहातें हैं
नैया जब भी फंसे
वही पार लगाते है!!
इतिहास बनाते है
नन्ही चिड़िया को
वें बाज बनाते है !!
सद्मार्ग दिखाते है
भटके राही को
वही लक्ष्य बताते है!
केशव बन जातें है
सत्य की रक्षा को
वे लीला रचातें है !!
गुरुवार, 5 सितंबर 2019
मुक्तक-गुरु वो है जो श्यापपट्ट से सूरज उगाया करते है
कभी शिवा,कभी अर्जुन,कभी चंद्रगुप्त बनाया करते है !
हमारी छिपी शक्तियों से हमें अवगत कराया करते है!
सिर्फ मनुष्य न जानों देवों से भी कद ऊँचा है इनका ,
गुरु वो है जो श्यामपट्ट से सूरज उगाया करते है !!
बुधवार, 4 सितंबर 2019
जयचंदों का उपचार करो
जो भारत में रहकर हरदम गीत पड़ोसी
गातें हो !
सेना को गाली देते पर अन्न हमारा
खाते हो !
भारत तेरे टुकड़े होंगे नारे जिनको
भाते है !
देशद्रोहियों के संग अक्सर खड़े नजर
जो आते है !
काश्मीर की शांत फिजा भी जिनको
यहाँ अखरता है !
जिनके दम पर बुजदिल पाकिस्तान
सदा दम भरता है !
दुश्मन की औकात ही क्या है उस पर
बाद में वार करो
पहले चुन-चुनकर ऐसे जयचंदों का
उपचार करो !!
मुक्तक-हिंदुस्तान नही बेंचा करते,,,
भूखे रहकर भी हरगिज ईमान नही बेचा करते !
भारत के वासी अपना सम्मान नही बेंचा करते!
आदर्शों की खातिर भूखे ही सूली चढ़ जाते है,
किंतु कभी वो अपना हिंदुस्तान नही बेंचा करते !!
सोमवार, 2 सितंबर 2019
रविवार, 1 सितंबर 2019
इन दिनों
फूल भी अब "खार" में बदलने लगा है इन दिनों !
"प्यार" भी अब व्यापार लगने लगा है इन दिनों !
नकली मुस्कान,नकली खुशी,नकली अपनापन,
सिर्फ दिखावे का चलन चलने लगा है इन दिनों !!
कवि सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
सपनों का महल बिखर गया,,,,
वादा करके कोई अपना मुकर गया आज फिर !
इन आंखों को समंदर वो कर गया आज फिर !
मिन्नतें लाख की हमने उनसे मुहब्बत की खातिर ,
अफ़सोस सपनों का महल बिखर गया आज
फिर !!
बुधवार, 28 अगस्त 2019
पाक पड़ोसी हवा दे रहा
गजब जवाब मिला है अबकी,आतंकी व्यापारी को !
नफरत बोंता था घाटी में,ऐसे अत्याचारी को !
खाया है हर बार मात पर,युद्ध की धमकी फिर देकर,
पाक पड़ोसी हवा दे रहा,नफरत की चिंगारी को !!
रविवार, 25 अगस्त 2019
नाज है सिंधु
तेरी उपलब्धियों पर देश गदगद आज है सिंधु !
बनाया है लगन से खुद को तूने ताज है सिंधु !
किया प्रेरित है लाखों बेटियों को तूने मेहनत से,
तेरी इस जीत पर हिन्दुस्ता को नाज है सिंधु !!