नकल vs मौलिकता
खोया अपना रंग है, बनी नही पहचान |
दूजों की करके नकल, ढूंढ रहा था मान |
ढूंढ रहा था मान, दिखावा उसको भाया |
मौलिकता को छोड़, रंग अपना बिसराया |
माया में फंस नील, रहा हरदम ही सोया |
अंदर जाना छोड़, रहा बाहर ही खोया ||
सुनिल शर्मा नील
छत्तीसगढ़
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