गधा हुआ है ढेर
फूला था अभिमान में, खुद को समझा शेर |
आया जब सच सामने, गधा हुआ है ढेर |
गधा हुआ है ढेर, भरम सारा है टूटा |
बहुत दिखाया रौब, दंभ का गागर फूटा |
समय दिखाया सांच, रौब अब अपना भूला |
शर्मशार है आज, रहा करता था फूला ||
सुनिल शर्मा नील
गुवारा,छत्तीसगढ़
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