जीना हुआ हराम
मानव तेरे पाप का, देख आज परिणाम |
जल थल सब विषमय हुए, जीना हुआ हराम |
जीना हुआ हराम, जहर वायु में फैला |
शक्ति में हो चूर, किया पृथ्वी को मैला |
हुआ स्वार्थ का दास, बना कलयुग का दानव |
भूला सहअस्तित्व, आज का लोभी मानव ||
सुनिल शर्मा नील
छत्तीसगढ़
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें