प्रणाम आदरणीय मंच
प्रदत्त पंक्ति-- बदलावों का दौर
विधा-- दोहा
दिनांक-- 18/02/2026
बदलावों का दौर है, मत होना तुम दंग |
अपना कोई आपको, अगर दिखाए रंग |
बदलावों का दौर है, बदलो खुद को आप |
बीत गया वह भूल जा, करो नही संताप ||
बदलावों का दौर है, तकनीकी संसार |
सीख सके ना जो इसे, समझो वो बेकार ||
बदलावों का दौर है, कम होते संस्कार |
नंगेपन का हो रहा, दुनिया में विस्तार ||
बदलावों का दौर है, ढूंढ रहा है प्यार |
संबंधो का आजकल, हुआ स्वार्थ आधार ||
सुनिल शर्मा नील
गुवारा, थानखम्हरिया (छग )
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