बुधवार, 21 अगस्त 2019

छंद-जननी जनक भूला दें

उन्नति की शिखर पे चढ़ते रहिए किंतु
जमीं से कभी भी जुड़ा रिश्ता मत तोड़ना!

तेरी नींद के लिए जो जागे सारी रात प्यारे
उन बागबानों से कभी न मुख मोड़ना !

स्वार्थ के लिए भूला दे जननी जनक दोनों
ऐसी कामिनी से तार प्यार के न जोड़ना !

उंगली पकड़के जिन्होंने चलना सिखाया
जिंदगी में उनका तू हाथ नही छोड़ना !!

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

माँ पिता का हाथ नही छोड़ना,,,,

उन्नति की शिखर पे चढ़ते रहिए किंतु
जमीं से कभी भी जुड़ा रिश्ता न तोड़ना !
तेरी नींद के लिए जो जागा किये रातभर
उन बागबानों से कभी न मुख मोड़ना !
स्वार्थ के लिए भूला दे रिश्तें माँ बाप के जो
ऐसी कामिनी से तार प्यार के न जोड़ना !
उंगली पकड़के जिन्होंने चलना सिखाया,
ऐसे माँ पिता का कभी हाथ नही छोड़ना !!

रविवार, 18 अगस्त 2019

जमीं से कभी भी जुड़ा रिश्ता न तोड़ना,,,,

प्राप्तकर आसमां की लाख तू ऊँचाई पर जमीं से कभी भी जुड़ा रिश्ता न तोड़ना ! तेरे मुखड़े पे खुशी लाने खुदको भूलाया देख ऐसे मुखड़ों को मुख नही मोड़ना ! प्यार के लिए भूला दे रिश्ते मां बाप के जो ऐसे प्यार के कभी भी तार नही जोड़ना! उंगली पकड़के जिन्होंने चलना सिखाया, बुढापे में उनको वृद्धाश्रम न छोड़ना !!

तुमको इससे क्या?

मैं रोऊँ या मुस्कुराऊँ
तन्हा आँसू बहाऊँ
गीत विरह के गाऊँ
अपनी पलकें भिगाउँ
अपनी भावनाएं जाहिर करूँ
या दुनिया से छिपाऊँ
तुमको इससे क्या?

तेरी बेवफाई सहकर जियूँ
या तड़पकर मर जाऊँ
तेरा नाम लिख हथेली में
दुनियाभर से छिपाऊं
दुनिया से व्हाट्सएप्प स्टेटस छुपा
सिर्फ एक तुझे दिखाऊँ
तुमको इससे क्या?

बीते पलों में खो जाऊँ
सुधबुध सारी बिसराऊँ
घुट-घुटकर बेवफाई में
मछली सी प्राण गवाऊँ
यह अंधेरा जो तेरा ही दिया है
इसे अंतिम श्वास तक गले लगाऊँ!
तुमको इससे क्या?










एक दिन आराम का,,,

नाहक चिंता क्यों करता है विश्राम का !
कर्म कर बंदे न सोंच तू अंजाम का !
कुछ ऐसा कर कि जमाना याद रखे तुझे,
आखिर में आना है एक दिन आराम का !!

सुनिल शर्मा"नील"

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

राखी का सम्मान करेंगे,,,,


सारी खुशियाँ दे बहनों को,पूरे हम अरमान करेंगे !
काल बनेंगे उनका हम जो नारी काअपमान करेंगे !
बहन डरें न सड़क पे कोई,देश बनाकर ऐसा हम
शपथ उठाएं भाई सारे,राखी का सम्मान करेंगे !!

सोमवार, 12 अगस्त 2019

जो कहते थे गंवारा एक पल तुम बिन नही साथी,,,,,

हुआ करतें थे हमसाया वही अब दूर बैठें है  !
बने किसी और की आंखों के अब वो नूर बैठें है !
जो कहते थे गंवारा एकपल तुमबिन नही साथी ,
वफ़ा ठुकरा मेरी किसी और संग मगरूर बैठें है !!