विलय हो गयासच अर्थों में पुलकित सारी घाटी है !
एक देश में दो विधान की खत्म हुई परिपाटी है !
प्राण दिए है जिन बेटों ने लाने खातिर इस दिन को,
उन शहीद बेटों का करती धन्यवाद यह माटी है !!
सोमवार, 5 अगस्त 2019
एक देश में दो विधान की,,,
रविवार, 4 अगस्त 2019
बहुत हो चुका एक देश में दो विधान,दो संविधान
अभिन्न अंग है कश्मीर भारत का रूख इसपर कड़ा हो जाने दो !
लाल चौक पर लेकर तिरंगा देशभक्तों को खड़ा हो जाने दो !
बहुत सह चुके नियम एक देश में दो विधान और
दो संविधान का
चाहे जो हो अंजाम फैसला इसपर बड़ा हो जाने दो !!
शनिवार, 3 अगस्त 2019
वक्त से कोई बच न पाया
हौसला जब पीर को हमने बनाया।
फूल पत्थर में खिलाकर जग हँसाया।
शक्ति हो बाहों में तो दुनिया तुम्हारी
सूत्र हमको जिंदगी ने यह सिखाया !
शूल पर चलता रहा जो होकर अविचल
आसमां कदमों तले उसने झुकाया !
आफतों को गालियाँ दो इस तरह न
इसने ही हमको तपा कुंदन बनाया !
सत्य का करता रहा हूँ अनुसरण मैं
इसलिए खुदको सदा तन्हा ही पाया!
हँसने वालों चोंट पर औरों के सुनलो
"नील" कहता वक्त से कोई बच पाया !
-सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
गजल-शूल पर चलता रहा,,,
1)हौसला जब पीर को हमने बनाया।
फूल पत्थर में खिलाकर जग हँसाया।
2)शक्ति हो बाहों में तो दुनिया तुम्हारी
सूत्र हमको जिंदगी ने यह सिखाया !
3)शूल पर चलता रहा जो होकर अविचल
आसमां कदमों तले उसने झुकाया !
4)था भरोसा जिनपे हमको सबसे ज्यादा
सबसे ज्यादा दिल उन्होंने ही दुखाया !
5)कौन अपना और पराया जिंदगी में
मुफलिसी ने हमको आकर है बताया !
6)आफतों को गालियाँ दो इस तरह न
इसने ही हमको तपा कुंदन बनाया !
7)सत्य का करता सदा जो अनुसरण है
वह सदा रहता है तन्हा हमने पाया!
8)हँसने वालों चोंट पर औरों के सुनलो
वक्त से कोई कहा भला बच हैं पाया !
शुक्रवार, 2 अगस्त 2019
हौसला जब पीर को-गजल
1)हौसला जब पीर को हमने बनाया।
फूल पत्थर में खिलाकर जग हँसाया।
2)शक्ति हो बाहों में तो दुनिया तुम्हारी
सूत्र हमको जिंदगी ने यह सिखाया !
3)कौन अपना और पराया जिंदगी में
मुफलिसी ने हमको आकर है बताया !
4)आफतों को गालियाँ दो इस तरह न
इसने ही हमको तपा कुंदन बनाया !
5)पथ के शूल पे चला होकर जो अविचल
आसमा कदमों तले उसने झुकाया !
6)सत्य का करता सदा जो अनुसरण है
वह सदा रहता अकेला हमने पाया!
7)सम रहा जो दुःख व सुख की स्थिति में
बस उसे ही जिंदगी हरक्षण है भाया !!
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मापनी : 2122 2122 2122
काफ़िया : आया ,
रदीफ़ : बिना रदीफ़ के
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गुरुवार, 1 अगस्त 2019
उन्नाव रेप कांड
सत्ता हो या हो विपक्ष भेडियें तो भेड़िये है
बलात्कारी भेड़ियो से देश को बचाइए !
रक्षकों के चोलों में जो भक्षक छुपे हुए है
उन पापाचारियों को सबक सिखाइए !
बेटियाँ बचाने बिल लाइयेगा तीन तलाक
पहले मर रही बेटियों को तो बचाइए ,
कर रही गुहार बेटी उन्नाव की है आज
अपराधी उसके पहले सूली पे चढाईये !!
हरा भरा सावन भी पतझड़,,,,
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पावस में जब सो जाते सब,मन मेरा यह जगता है !
दुनिया को देकर यह खुशियाँ, सिर्फ मुझे ही ठगता है!
बिन पानी ज्यों मीन तड़पती,मैं भी तरसूं पी के बिन,
'हरा-भरा सावन भी पतझर,क्यों विरहिन को लगता है ।।'
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