मंगलवार, 26 जुलाई 2022

रणवीर ऐसा क्यों

क्यों किया ऐसा रणवीर??
(रणवीर के न्यूड फोटोशूट पर त्वरित सृजन)

बेंच चित्र अश्लील, देश का नाम घटाया |
कला किया बदनाम, शर्म ना किंचित आया ||
तू लज्जा से हीन, किया भारत में ऐसा |
करना था क्या काम, किया रणवीर है कैसा ||

बच्चें इसको देख ,सोंच क्या ज्ञान पाएंगे |
मान तुम्हें आदर्श, छले सारे जाएंगे ||
भारत पावन देश, गुरु जो है कहलाया |
इसमें पाकर जन्म,ये कैसा कर्ज निभाया ||

नारी सीता रूप, यहाँ नर राम कहाते |
नौ कन्या नौ रूप, देश में पूजे जाते ||
नारी बच्चें आज, सभी तुझसे शर्मिंदा |
पढा लिखा तू मूर्ख, कृत्य तेरा यह गंदा ||

दुर्योधन से सीख, मातु ने जब बुलवाया |
दूँगी मैं आशीष, मगर जो अंग छुपाया ||
तू उससे है नीच, मानसिक कचरा पाले |
चमड़ी से है गौर, मगर भीतर से काले ||

करता है यह 'नील', क्रोध उनपर भी भारी |
पथ से जो हो भ्रष्ट, बढाते ये महामारी ||
जो 'सैनिक' को छोंड़, सरआखो इन्हें बिठाते |
चंदन को जो छोंड़, माथ पर पंक लगाते ||

कवि सुनिल शर्मा 'नील'
थान्खम्हरिया(छत्तीसगढ़)
8839740208

बुधवार, 13 जुलाई 2022

मत्तगयन्द सवैया-परमारथ

मत्तगयन्द सवैया
प्रयास-1
विषय-परमारथ

पीयय ना जल ला नदिया अपने फल रूख कभू नइ खावै |
सूरज रोज उवै तबले गुनगान कभू अपने नइ गावै |
ताप हरे बरखा सबके खुद खातिर बादर हा नइ छावै |
सज्जन के धन लाख लगै परमारथ मा नइ नाम बतावै ||


सुनिल शर्मा'नील'
थान खम्हरिया(छत्तीसगढ़)

रविवार, 26 जून 2022

मुक्तक-नारी

वही बहना,वही तो माँ,वही बिटिया 
दुलारी है |
उसी से है सभी रिश्तें उसी से सृष्टि 
सारी है |
सदा वह बाँटकर खुशियाँ,दुःखों को 
झेलती आई,
करे जो त्याग हर युग में उसी का नाम 
नारी है ||

कवि सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया

सोमवार, 13 जून 2022

कुंडलिया-बलवा जो करवा रहे हर जुम्मे के रोज

बलवा जो करवा रहें, हर जुम्मे के रोज |
घर-घर जाकर कीजिये, उन गुंडों की खोज ||
उन गुंडों की खोज, छीन सुविधा सरकारी |
पृष्ठ भाग कर लाल, दंड दो उनको भारी |
घर उनके दो तोड़, दिखा योगी सा जलवा |
बाबर की औलाद, बने जो करते बलवा ||

सुनिल शर्मा 'नील'
थानखम्हरिया
8839740208

शनिवार, 11 जून 2022

केवड़े को हेय से न देखिएगा

केवड़े को हेय से न देखिएगा यूँ जनाब
सोंचके कि देता नही गुल जैसा गंध है |

एक पलड़े में दोनों को ना तौलिएगा कभी 
दोनों है कुसुम मात्र एक ही सम्बन्ध है |

तुलना किसी की किसी से नही उचित कभी
दोनों है प्रभावी कविता हो या निबंध है |

अनुपम है सभी जगदीश्वर की सृष्टि में
परमपिता का श्रेष्ठ यही तो प्रबंध है ||

सुनिल शर्मा 'नील'
8839740208
(छत्तीसगढ़)
सर्वाधिकार सुरक्षित

मंगलवार, 7 जून 2022

नारी अस्मिता पे घात जो यहाँ लगाता है

कीचक रावण दुशासन जयद्रथ बाली
नारी अस्मिता पे घात जो यहाँ लगाता है |

करता शोणित से स्नान स्वयं के सदा वो
प्राण पद मान वंश स्वयं का गँवाता है |

नारी स्वाभिमान पर मौन रहकर भीष्म
अंत का समय बाण शैय्या पे बिताता है |

नारी लज्जा हेतु निज प्राण को गँवाता गिद्ध 
मृत्यु के समय गोद राम जी का पाता है ||


सुनिल शर्मा 'नील'
4 /06/2022

शनिवार, 4 जून 2022

इतिहास आदरेय है,,,,

इतिहास आदरेय है बड़ा ये मानो किन्तु
जैसे का तैसा न उसे कभी भी स्वीकारिये |

मान के आदर्श धर्मराज को न खेल द्युत
भाईयों के संग निज नार को न हारिये |

दृष्टांत द्रौपदी को मान कन्या ब्याह करे
होगा क्या उचित वर्तमान में विचारिये |

करके अतीत का मूल्यांकन चुनिए मार्ग
भूल क्या-क्या हमसे हुई थी वो सुधारिये ||

सुनिल शर्मा नील
4/6/2022