बुधवार, 4 दिसंबर 2019

निर्भया की पीड़ा

               निर्भया की पीड़ा

शर्मसार हुई है मानवता फिर अबला के
चित्कारो से
फिर हुई है शिकार कोई वासना के कुत्सित
विकारों से!

उजड़ गया है आज फिर किसी बेटी का
चमन
जीते जी आज हार गया है फिर किसी
का जीवन!

वह रोती गिड़गिड़ाती और चिखती रही पर न
जागी  दैत्यों की चेतना
कैसे कहूँ कहा नही जाता उस अबला की
मुझसे वेदना!

सन्नाटे की हरेक आहट से घबरा जाया
करती है
भय के कारण कोने में डरकर सिमट जाया
करती है!

वो भयावह मंजर अक्सर उसे डराया
करतें है
गंदी मानसिकता के चलचित्र दिखाया
करतें है!

झूल रही है जिंदगी उसकी अस्पताल
में
गूंजा करते थे हँसी कभी घर के दीवाल
में!

बाबा की आंखें पाषाण और माँ के कंठ
अवरुद्ध है
द्रौपदी के चिर बचाने वाले कन्हैया वे आपपर
भी क्रुद्ध है!!

कवि सुनिल शर्मा "नील"
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मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

शस्त्र भी दिलाइए,,,,

हर गली घूम रहे,दुशासनों के है झुंड
बहु और बेटियों को,इनसे बचाइए !

चीर को बचाने नही,आएंगे गोविंद अब
आत्मरक्षा हेतु उन्हें,सबल बनाइए!

अबला नही है नारी,दुर्गा का रूप है वें
बालपन से उन्हें ये,घुट्टियाँ पिलाइए!

महँगे दिलाये सेल,उनको परन्तु आप
संग-संग कोई उन्हें,शस्त्र भी दिलाइए!!

शनिवार, 30 नवंबर 2019

किसी बेटी की हत्या,,,,

स्वार्थ के बादलों से संवेदनाओं की रोशनी छनती कहाँ है
सियासत की टेंट बिना मतलब कही तनती कहाँ है !
तैमूर के डायपर पर दिनरात चलती है ब्रेकिंग न्यूज यहाँ,
किसी बेटी की हत्या देश में खबर अब बनती कहाँ है !

शनिवार, 23 नवंबर 2019

महाराष्ट्र राजनीति

हाथ में आया हुआ सबकुछ फिसल गया !
रात का अंधेरा पूरा अरमान निगल गया !
बाराती रातभर नाचते गाते रहे शादी में,
सुबह होने पर पता चला दूल्हा बदल गया !!

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

तरसना भी जरूरी है,,,,


गमों के मेघ आँखों से बरसना भी जरूरी है !
सदा रोना नही अच्छा हरषना भी ज़रूरी है !
जरूरी है नही चाहो जिसे वह सब मुकम्मल हो ,
सदा पाना नही अच्छा तरसना भी जरूरी है !!

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

सबसे ऊपर हम रखें प्यारा वतन अपना,,,

भले ही खाक हो जाए ये मिट्टी का
बदन अपना !
कभी उजड़े नही लेकिन ये सुंदर सा
चमन अपना !
न जाति और न मजहब न कोई प्रांत
पहले हो ,
सदा ही सबसे ऊपर हम रखे प्यारा
वतन अपना!!

शनिवार, 9 नवंबर 2019

रामलला पर दोहावली,,,,,,

सपने देखे थे कभी,आज हुए साकार !
मंदिर मेरे राम का,लेगा अब आकार !

खुशियों से भींगे नयन,फूटी है जलधार,
रामलला को मिल गया,मंदिर का अधिकार!!

महलों में थे हम सभी,तंबू में थे राम
पाने में वर्षों लगें,उनको अपना धाम

प्रभु जी के वनवास का,आज हुआ है अंत
नमन सभी के त्याग को,क्या नेता क्या संत

मना रहा है दीवाली,भारत दो-दो बार
न्यायालय के न्याय को,नमन सैकड़ो बार

हिन्दू-मुस्लिम धैर्य को,शत-शत मेरा प्रणाम
अनुशासन अरु प्रेम का,दिया गजब पैगाम

भड़काए जो धर्म पर,उनको मिले जवाब
पसन्द नही यह देश तो,पाक में रहें जनाब

यह कलाम का देश है,रहें यहाँ रसखान
जिनको भारत देश ने,सदा दिया है मान

जिन्ना जैसा व्यर्थ न,करिए आप प्रलाप
भारत सारा जानता,कितने विषधर आप!!