शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

रियासत की खातिर सियासत बदल दी,,,

कब किसका बदल जाए मन पता नही!
यहाँ कौन मलिन है कौन पावन पता नही !
रियासत की खातिर सियासत बदल दी,
इसमें दोस्त कब बन जाए दुश्मन पता नही!!

सियासत के बिसात में,,,

यहाँ कब किसका बदल जाए मन पता नही!
कौन यहाँ मलिन और कौन पावन पता नही !
सियासत के इस खेल में स्वार्थ ही सबकुछ है,
इसमें दोस्त कब बन जाए दुश्मन पता नही!!

गुरुवार, 7 नवंबर 2019

जिनके नाम लेखन से पत्थर भी ,,,,


दशरथ के पितृत्व,सीता मैया के सतित्व
भरतलाल के महान,प्रण को प्रणाम है !

राम जी के प्रियवर,वीरों में जो है प्रवर
शेषनाग के स्वरूप,लक्ष्मण को प्रणाम है!

भाइयों में है कनिष्ठ,वीर व कर्तव्यनिष्ठ
धीर वीर व गम्भीर,शत्रुहन को प्रणाम है!

जिनके नाम लेखन से,पत्थर भी तैरते है
ऐसे श्रीराम जी के,चरन को प्रणाम है!!

रविवार, 3 नवंबर 2019

आज दिल्ली की कल हमारी,,,,,

आज दिल्ली की कल हमारी बारी है !
हल कुछ नही आरोप प्रत्यारोप जारी है !
गैस चैम्बर बनता जा रहे है शहर सारे ,
यह विकास है या विनाश की तैयारी है !!

रूप घनाक्षरी-रोटियाँ भले ही खाले घास के,,,,

भारती के वीरपुत्र,रण में बहाते लहू
भारती के दूध को,लजाया नही करते

रणभू में बोलती है,शौर्य उनकी सदा ही
शत्रुओं को पीठ वे,दिखाया नही करतें

जीतता पराक्रम या,वरते है काल को वे
स्वाभिमान को कभी,गँवाया नही करते

रोटियां भले ही खा लें,घास के परन्तु 'राणा'
शत्रु के समक्ष सिर,झुकाया नही करते !!

रोटियाँ भले ही खाले घास के,,,,

भारती के वीरपुत्र,रण में बहाते लहू
भारती के दूध को,लजाया नही करते

रणभू में बोलती है,शौर्य उनकी सदा ही
शत्रुओं को पीठ वे,दिखाया नही करतें

जीतता पराक्रम या,वरते है काल को वे
स्वाभिमान को कभी,गँवाया नही करते

रोटियां भले ही खा लें,घास के परन्तु 'राणा'
शत्रु के समक्ष सिर,झुकाया नही करते !!

शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

तुम वतन में भाईचारा

परस्पर लड़ना नही चमन गुलजार बनाये रखना!
अमन व सुकून का महकता संसार बनाये रखना!
मैं डटा रहूँगा अंतिम श्वास तक सीमा की रक्षा में
तुम वतन में भाईचारा का व्यवहार बनायेरखना!!

कवि सुनिल"नील"
7828927284