घोर अंधेरी रात है बीती सुबह सुनहरी आई है !
कश्मीर में तीन सौ सत्तर की पट गई देखो खाई है !
गंध छंटी है बारूदी जो जमी थी केसर क्यारी में,
बहुत दिनों के बाद पुनः भारत माता मुस्काई है !!
शनिवार, 10 अगस्त 2019
बहुत दिनों के बाद आज भारतमाता मुस्काई है,,,,
शुक्रवार, 9 अगस्त 2019
बहुत दिनों के बाद आज भारतमाता मुस्काई है,,,,
घोर अंधेरी रात है बीती सुबह सुनहरी
आई है !
कश्मीर से तीन सौ सत्तर की पट गई
देखो खाई है !
गंध छटी है बारूदी जो जमी थी केशर
घाटी में ,
बहुत दिनों के बाद आज भारत माता
मुस्काई है !!
बनी देश का अभिमान-सुषमा स्वराज जी को समर्पित
बनी देश का अभिमान
एक आवाज थी जग में पहचान जो ।
अलविदा कह चली देश की शान जो।
माँ बनकर कितनों की जिंदगी बचाकर
विश्वपटल पर बढाई स्वदेश का मान जो!!
राजदूत रही विश्व में भारत के संस्कृति की
अंतिम श्वास तक गाती रही राष्ट्र का गान जो!
दुर्गा तो कभी सरस्वती के दर्शन हुए उनमें
सौम्यता का देती रही आजीवन ज्ञान जो !
मातृ शक्ति का प्रतीक प्रेरणा रही सबकी
माँ भारती की बेटी बनी जनजन का अभिमान जो
स्वहित पर सदा देश को रखा किया ऊपर
कृतित्व से अपने बनी देश की आन जो!
-सुनिल शर्मा "नील"
मापनी : 212 212 212 212
काफ़िया : आन ।
रदीफ़ : जो ।
आन,कान,गान,दान,धान,भान,यान,ज्ञान
बुधवार, 7 अगस्त 2019
पूरा वतन रो दिया,,,,,
फूल जब डाली से जुदा हुआ तो चमन रो दिया !
अर्थी जब सजाई गई उसकी तो कफ़न रो दिया !
घर-घर से भारत के ऐसा नाता जोड़ गई वह बेटी ,
हुई जब उसकी विदाई तो पूरा वतन रो दिया !!
सोमवार, 5 अगस्त 2019
एक देश में दो विधान की,,,
विलय हो गयासच अर्थों में पुलकित सारी घाटी है !
एक देश में दो विधान की खत्म हुई परिपाटी है !
प्राण दिए है जिन बेटों ने लाने खातिर इस दिन को,
उन शहीद बेटों का करती धन्यवाद यह माटी है !!
रविवार, 4 अगस्त 2019
बहुत हो चुका एक देश में दो विधान,दो संविधान
अभिन्न अंग है कश्मीर भारत का रूख इसपर कड़ा हो जाने दो !
लाल चौक पर लेकर तिरंगा देशभक्तों को खड़ा हो जाने दो !
बहुत सह चुके नियम एक देश में दो विधान और
दो संविधान का
चाहे जो हो अंजाम फैसला इसपर बड़ा हो जाने दो !!
शनिवार, 3 अगस्त 2019
वक्त से कोई बच न पाया
हौसला जब पीर को हमने बनाया।
फूल पत्थर में खिलाकर जग हँसाया।
शक्ति हो बाहों में तो दुनिया तुम्हारी
सूत्र हमको जिंदगी ने यह सिखाया !
शूल पर चलता रहा जो होकर अविचल
आसमां कदमों तले उसने झुकाया !
आफतों को गालियाँ दो इस तरह न
इसने ही हमको तपा कुंदन बनाया !
सत्य का करता रहा हूँ अनुसरण मैं
इसलिए खुदको सदा तन्हा ही पाया!
हँसने वालों चोंट पर औरों के सुनलो
"नील" कहता वक्त से कोई बच पाया !
-सुनिल शर्मा"नील"
7828927284