जो बोया सो काट
बाँटा था सबको जहर, वही रहा है चाँट |
करनी का फल मिल रहा, जो बोया सो काट |
जो बोया सो काट, भुगतना यही पड़ेगा |
नहीं मिलेगा मोक्ष, मूढ तू यही सड़ेगा |
कर ले पश्चाताप, बहुत बोया है काँटा |
वही पा रहा आज, कभी जो तूने बाँटा |
सुनिल शर्मा नील
गुवारा, थानखमरिया (छत्तीसगढ़ )
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