मोर पंख
शुक्रवार, 21 अगस्त 2020
पति पत्नि-कुंडलियां
गाड़ी जीवन की तभी,चलती है निर्बाध
पति-पत्नी के मध्य में,जब हो प्रेम अगाध
जब हो प्रेम अगाध,परस्पर समझ हो गहरी
फिर कैसी चिंता,देहाती हो या शहरी
रिश्तें मांगें विश्वास,नही पैसे और साड़ी
बात रखो जो ध्यान,चलेगी शान से गाड़ी!!
कुंडलियां-चक्की
चक्की है जीवन अगर,पति-पत्नी है हाथ
चलती यह चक्की तभी,जब हों दोनो साथ
जब हो दोनों साथ,पीसेगा बारिक आटा
सहेंगे सुख दुख को,लाभ हो चाहे घाटा
कहे नील कविराय,बात मैं कहता पक्की
रखें परस्पर प्रेम,चलेगी बरसों चक्की!!
सुनिल शर्मा नील
थान खम्हरिया
गुरुवार, 20 अगस्त 2020
संगत में,,,,दोहा
संगत में जी आपके,लागा ऐसा रोग
दोहा सृजन बिना किए,स्वाद न आए भोग
दोहा
21/08/2020,,,
सृजन सरोवर
जप पूजा करतें मगर,नही बड़ों का मान
ऐसे पूजा जाप का,अर्थ नही श्रीमान !!
कवि सुनिल नील
बेमेतरा(छत्तीसगढ़)
सोमवार, 10 अगस्त 2020
हर माइक वाले को
गली के गुंडे को सरकार मत समझना !
साहिल को भूलके मझधार मत समझना !
माइक होते है दलालों के भी हाथों में,
हर माइकवाले को पत्रकार मत समझना!!
बौने
सिंह समझ बैठा मृगछौने निकले तुम !
चाबी से चलने वाले खिलौने निकले तुम !
हमारे कत्ल को तुम खंजर छुपाए रहे
बड़ा समझा तुम्हे किरदार से बौने निकले तुम!!
रविवार, 9 अगस्त 2020
सीमाएं है घाव
मानवता के वक्ष पर,सीमाएं है घाव
यहाँ युद्ध के खेल के,खेले जाते दाव
खेले जाते दाव, लाभ किसको है होता
खोते दोनो पक्ष,सदा दुःख ही यह बोता
खींचो नही लकीर,मनुज करके दानवता
स्वजनों को ले छीन,रौंदकर जो मानवता!!
कवि सुनिल शर्मा "नील"
7828927284
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