मोर पंख
कवि सुनिल शर्मा"नील"7828927284
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मंगलवार, 21 जुलाई 2020
माँ पिता के पाँव
दुःखों के ताप मिट जाए सदा वह
छाँव देतें है !
दुआ के मरहमो से वें मिटा सब घाव
देतें है !
कभी तीरथ गया और न कभी गंगा
नहाया है ,
मुझे सब धाम के फल माँ पिता के पाँव
देतें है!!
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