शनिवार, 10 अप्रैल 2021

रामभक्त हनुमान(छप्पय छंद 4)

छप्पय प्रयास -3
*रामभक्त हनुमान*
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जा के सागर पार, खबर सीता के लाये |
झोंक आज वरदान, मोर मन हे हरसाये ||
सब ले बड़का भक्त, वत्स हनुमान कहाबे |
छू नइ पावय काल, अमर हो पूजे जाबे ||
पूजा करही तोर जे, अपन नवाही माथ ला |
रइही ओखर मूड़ मा, किरपा के मोर हाथ हा ||
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सुनिल शर्मा

कोरोना (छप्पय छंद 4)

छप्पय छंद-४
*कोरोना*
सुधार के बाद
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चीन देश ले आय, करोना नाम धराए |
बाँटत हावय मौत,जगत ला ये रोवाए ||
मरगे लाखो लोग, करोड़ों घर हे टूटे |
डर के हे माहौल, नौकरी मन हे छूटे ||
बीमारी ये हारही, लड़बो जुरमिल संग रे |
करबो हम कर्तव्य ला, खचित जीतबो जंग रे ||
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सुनिल शर्मा"नील"

बुधवार, 7 अप्रैल 2021

छप्पय छंद(नक्सली समस्या)

छप्पय छंद प्रयास
*नक्सल समस्या -1*
सुधार के बाद
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बेटा मन रणवीर, खून के खेलत होली |
होवत हवय शहीद, दिनोदिन खा के गोली ||
बाढ़त नक्सलवाद, हँसत पापी मन भारी |
होवय इँखरो नाश, होत बस निमगा चारी ||
मानवता के जेंन भी, दिखथे इहाँ खिलाफ हे |
खोज-खोज के मार के, उन ला करना साफ हे |
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सुनिल शर्मा"नील"

छप्पय-2(गर्मी)

छप्पय -2
विषय-गर्मी
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गरमी के दिन आय, घाम हर खूब 
जनावय |
सड़क दिखय सुनसान, ठहरना घर मा भावय ||
खोजय सबझन छाँव, पसीना बड़ चुचवावय |
खीरा ककड़ी संग, कलिंदर खूब 
खवावय ||
तरिया नदिया बोर सब, देवत हवय जवाब
अब |
मनखे तुँहर पाप के, होवत हवय हिसाब 
अब |
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सुनिल शर्मा

गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

गांधी नही भगत की नीति होनी चाहिए

देश है विशेष स्नेह इससे करे अशेष
वन्दे मातरम वाली,गीति होनी चाहिए |

माता भारती के स्नेह से करे गद्दारी कोई
उनसे न कोई कभी प्रीति होनी चाहिए |

आसुरी प्रवृत्तियों की वृत्तियों के नाश हेतु |
गांधी नही भगत की नीति होनी चाहिए |

कोई गाल झापड़ जो मारे तो उखाड़ो हाथ
शठे शाथयम वाली रीति होनी चाहिए ||

बुधवार, 24 मार्च 2021

सहते रहें है छल

सहते रहें है छल,जाफर व कासिमो के
सदियों से भारत की ,है यही व्यथा रही |

प्रेम और मान दे दुलारतें रहें हैं जिन्हें
उनकी सदैव डसने की ही प्रथा रही |

भाई कह हृदय लगाके छुरी खाते रहें
भाईचारे वाली बात उनकी वृथा रही |

कमलेश रणजीत,गगन,अंकित,रिंकू
निर्दोषों के हत्याओं की सैकड़ों कथा रही ||

सुनिल शर्मा"नील"



गुरुवार, 18 मार्च 2021

अमृत ध्वनि 1(भोलेनाथ)

*अमृत ध्वनि छंद*
*भोलेनाथ*
क्रमांक-1
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गंगा हावय मूड़ मा, भसम लगाए अंग |
नरी बिराजे नाग हे, गौरी बइठे संग ||
गौरी बइठे ,संग माथ मा, चंदा हावय |
सुमिरव भोले, नाम जगत ले ,पार लगावय ||
जेंन नाव लय, होवय ओखर, तन-मन चंगा |
जय-जय भोले, धारे तैं हर, पावन गंगा ||
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सुनिल शर्मा