मंगलवार, 8 नवंबर 2016

कालाधन माटी हुआ.....

■■■■■■■■■◆■■■■■■◆◆ मोदी तेरे वार से भ्रष्टाचारी पस्त कालाधन माटी हुआ अर्थव्यवस्था मस्त ■■◆◆◆◆◆◆◆●●●◆◆◆●●●●● सुनिल शर्मा"नील" थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.) 7828927284 09/11/2016 CR

सोमवार, 7 नवंबर 2016

अपने साथ देने लगे अधर्म को

■■■■■■■■■■■■■■■■■■
"अपने" साथ देने लगे अधर्म को
भूलकर मानवता के मर्म को
जरूरी होता है उठाना गांडीव
दिखाए पाप आँखें जब धर्म को ■■■■■■■■■■■■■■■■■■
सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा
7828927284
कॉपीराइट
07/11/2016 "

रविवार, 6 नवंबर 2016

तकें है राह भाई की

एक फौजी के बहन की स्थिति का चित्र देखें,,,,,,,,,,,, ■■■■■■■■■■■■■■■■■■ जलाये आस का दीपक ,तकें है राह भाई की पता है वो गया रण पर ,मगर है चाह भाई की नयन से धार है बहती,निहारती चित्र को अपलक सभी बहनें हमेशा ही,करे परवाह भाई की| ■■■■■■■■■■■■■■■■■■ सुनिल शर्मा"नील" थान खम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.) 7828927284 06/11/2016 Copyright

बहन रोती है भाई की

**********************************
जलाये आस का दीपक  ,तकें है राह भाई की
पता है वो गया रण पर ,मगर है चाह भाई जी
नयन से धार है बहता निहारे चित्र को अपलक
टिकाकर गोद मैया की ,बहन रोती है भाई की|
***********************************
सुनिल शर्मा"नील"
7828927284
07/11/2016
Copyright

निहारे राह भाई की


भाई दूज पर एक जवान के घर का चित्र,,,,,,,,,,
*********************************
जलाकर आस का दीपक,निहारे राह
भाई की
जानती है वो रण भू पर ,है फिर भी चाह
भाई की
अश्रू की धाराएँ बहती,देखती चित्र को
अपलक
टिकाकर सिर को गोदी में,बहन रोती है
माई की|
*********************************
सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284
9755554470
Copyright
07/11/2016

शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

एक दीप भारतीय फ़ौज के लिए

""एक दीप भारतीय फ़ौज के लिए "" ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● जिनके बलिदानों से ही शांति का दीया जगमगाता है जलाना एक दीप उनके लिए भी जिनसे भारत मुस्कुराता है| ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● सुनिल शर्मा"नील" थान खम्हरिया,बेमेतरा 7828927284 30/10/2016 Copyright

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

एक कदम उजाले की ओर

"एक कदम उजाले की ओर" ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
"तम" को "श्रम" से हराकर,तिरंगा लहर-लहर लहराते है
"उद्यम" के महामंत्र से,भारत को पुनः
विश्वगुरु बनाते है
असीमित ऊर्जा निहित है हममें,आओ
पहचाने इसे
उजाले की ओर चलो एक कदम
बढ़ाते है

कहीं बर्बाद होता भोजन,कहीं लोग भूखे सो जाते है
ऐसे असमानता के रहते भला,किस
विकास पर इतराते है
इस दीवाली शांत कर भूखों की
क्षुधा को
प्रकाश में दीए के चलो "भूख" को
जलाते है

"बेटियाँ" आज भी भीड़ में निकलने से
घबराती है
कितनी बेटियों की अस्मत हर रोज लूटी
जाती है
करके दुशासनों का वध,हराकर कौरव
सेना को
समाज में नारी को निर्भयतापूर्वक जीना
सिखातें है

स्वार्थ में अंधे होकर हमने स्वयं पर ही
वार किया
नष्ट किया जल,जंगल और जमीन को
जीवों का संहार किया
इससे पहले पूर्णतः नष्ट हो जाए प्यारी
प्रकृति
चलो नारा "सहअस्तित्व" का जन-जन को सिखातें है

किस बात की डिग्रियाँ जब तक देश में अशिक्षा का नाम है
अंध्विश्वास और कुरीतियों के कारण राष्ट्र होता बदनाम है
हर कोने तक प्रकाशित हो शिक्षा का दिव्य प्रकाश
परस्पर मिलकर चलो एक ऐसा "दिनकर"
उगाते है

हमारे सुकून की खातिर जो सीमा पर प्राण गंवातें है
देश के कुछ आस्तीन फिर भी जिनका हौंसला गिराते है
बनकर संबल ऐसे माँ भारती के
सपूतों का
आतंकवादियों को चलो उनकी औकात
बताते है

स्वच्छता का भारत के हर घर में
संस्कार हो
स्वस्थ रहे समाज मेरा न कोई इसमें
विकार हो
भाव ये प्रतिबद्ध होकर दौड़े हर
भारतवासी  में
चलो मिलकर एक नया "स्वच्छ भारत
बनाते है| ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा(छ. ग.)
7828927284
28/10/2016
Copyright